" शालू के प्यार पर आलू का वार "
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|   Jun 13, 2017
" शालू के प्यार पर आलू का वार "

अब ना सच में मुझे ना बहुत चिन्ता हो रही है शालू की ,अब आप सब प्लीज यह मत कह देना । "कि क्या आप भी जब देखो किसी ना किसी की चिन्ता करती रहती है ।कभी परदे की तो कभी प्याज की ।भूल गयी क्या कि चिन्ता चिता समान होती है।" वैसे देखा जाये तो बात तो आपकी भी ठीक ही है ,मैं कौन सी कोई आला अधिकारी हूँ ।जो मेरी चिन्ता करने से दुनिया इधर की उधर हो जाये ।पर क्या करूँ यह जो दिल का मामला है ना वहाँ दिमाग काम नहीं ना करता । हाँ तो मैं आपको बता रही थी । कि बेचारी शालू का प्यार खतरे में है।इस बार प्याज तो महंगी नहीं हुई ,तो भाई बहन का प्यार तो बच गया ।राखी आयी और बिना किसी बड़े हंगामे के गुजर भी गयी। पर बेचारी शालू वो क्या करे ।उसके प्रेमी ने तो दुनिया जहान में ऐलान कर दिया था । " जब तक रहेगा समोसे में आलू ,तेरा रहूँगा ओ मेरी शालू "। और जानते है आप कल ही मैं समोसे की दूकान से चार समोसे लेकर आयी थी।और मेरी हैरानी की इन्तहा ना रही जब मुझे समोसे से आलू ढूँढने मे इतनी मेहनत करनी पड़ी। जितनी कोलम्बस ने अमेरिका को ढूँढने में ना करी हो।तब जाकर एक बड़े से समोसे में मुझे दो छोटे छोटे आलू मिले।अब बात तो सही है कि प्याज ना सही पर आलू इस बार बाजी मार ही ले गया है ।और यह सरफिरे आशिक तो मौके की फिराक में रहते है कि जैसे मौका मिलें वो अपना वादा तोड़े।और यहाँ तो कुछ करने की जरूरत ही नहीं है क्योंकि जिस तरह से आलू महंगा हो रहा है ।तो कोई बड़ी बात नहीं की भविष्य में आपको बिना आलू के समोसे मिलने लग जाये और अभागी शालू का प्यार अधूरा रह जाये।क्योंकि "जब तक रहेगा समोसे में आलू ,तेरा रहूँगा ओ मेरी शालू "। यह  वादा तो वादा है टूट ही जाता है 

और प्यार का क्या ,

वो जिन्दगी की उलझनों 

से जूझ पर एक दिन छूट ही जाता है। " नेहा अग्रवाल नेह "

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