" वो गलियां "
6642
13
2
|   Jun 22, 2017
" वो गलियां "

ठिठक गये कदम ,

जब गुजरे उन गलियों से ।

वो गलियां ,

जो गवाह थी लड़कपन के जूनून की ।। वो कॉलेज की ,

लाल ईटों की दिवारें और बड़ा सा दरवाजा ।

जिनके पीछे गुजरा था ,

पूरा लड़कपन और पागलपन।। दिल हुलस रहा था ,

कॉलेज के अन्दर जाने के लिए

पर पैरों को ,

अनदेखी बेड़िया रोक रही थी ।। बाहर खड़े खड़े ही ,

ख्यालों में महसूस कर रही थी।

उस घबराई सी लड़की को जो ,

डरते डरते एडमिशन फॉर्म लेने आयी थी ।। और अखबार की ,

एडमिशन लिस्ट में ।

अपना नाम देखकर ,

खुशी से बौराई थी ।। वो कैमिस्ट्री की लैब भी ,

आँखों के सामने बखूबी लहराई थी ।

जहाँ कई बार सिर्फ खूबसूरत रंगो को देखने के लिए ,

बहुत से केमिकल मिक्स कर दिया करती थी ।। और बेहद खूबसूरत रंग मिलने पर ,

अगले दिन ।

उसी रंग का दुपट्टा खोजते हुये ,

बाजारों की खाक छानती फिरती थी।। आज कोशिश करती है ,

खुशियों के केमिकल को मिक्स कर ।

इन्द्रधनुष बनाने की तो ,

जाने क्यों काला रंग ही बनता है ।। और वो बायोलॉजी की लैब ,

जहाँ काँपते हाथों से उस मेढ़क का डिसेक्शन कर डाला था ।

जिस मेढ़क को बचपन में देखकर ,

माँ के आँचल में छुप जाया करती थी।। माँ का आँचल ,

अब जुदा है ।

शायद इसलिए ,

अब मुश्किलों का डिसेक्शन नहीं कर पाती है । और सबसे खतरनाक ,

फिजिक्स की लैब ।

जिसके एक भी एक्सपेरिमेंट ,

कभी समझ ही नहीं आये थे उसे।। आज सोचती है,

तो लगता है ।

जिन्दगी के एक्सपेरिमेंट से तो ,

ईजी ही थे वो ।। आज सालों बाद ,

एक सवाल का जवाब मिल पाया है ।

कि क्यों लोग कहते थे ,

कि कॉलेज टाइम सबसे खूबसूरत होता है ।। क्योंकि ,

वो तो तब भी ।

परेशान हो जाती थी ,

एक्जाम दे देकर ।। पर फर्क तो है ना ,

वहाँ एक्जाम खत्म भी होते थे ।

हॉलिडे भी आते थे ,

चैन की साँस भी ली जाती थी ।। पर अब रोज नया एक्जाम ,

बिना किसी तैयारी के देना होता है उसे।

और पास ना होने पर जिन्दगी ,

दाँव पर लग जाती है ।। कैसे तलाश करे,

उस हँसती मुस्कुराती लड़की को वो।

जो जिन्दगी की जद्दोजहद में ,

दफ्न सी नजर आती है । जो बात बात में मुस्कुराती थी ,

छोटी से छोटी बात पर भी खिलखिलाती थी ।

आज वो लड़की बेहद खूबसूरती से ,

गम को छुपा हौले से मुस्कुराती है ।। कैसे रख दे वो कॉलेज में कदम ,

डरती है उस खुशनुमा लड़की का सामना करने में।

पगली नहीं जानती की कस्तूरी उसके पास है 

वो सरफिरी लड़की हमेशा उसके साथ है ।। जब तक वो ,

खुद हार नहीं मानती ।

जिन्दगी का कोई भी इम्तिहान ,

उसे हरा नहीं सकता ।। कॉलेज के बाहर आती ,

दिख गयी है उसे वो पागल सी लड़की।

जो मुस्कुरा कर अपनी सहेलियों को बता रही थी ,

टिट फॉर टैट बोले तो जैसे को तैसा।। मैं शहद से भी मीठी हूँ पर सिर्फ तब तक ,

जब तक आप शहद के छत्ते को तोड़ने की कोशिश नहीं करते ।

कॉलेज के बाहर ठिठक कर खड़ी लड़की भी अब खुल कर मुस्कुराती है ,

और अपने घरोंदे के लिए एक चट्टानी छत बन जाती है ।। " नेहा अग्रवाल नेह

Read More

This article was posted in the below categories. Follow them to read similar posts.
LEAVE A COMMENT
Enter Your Email Address to Receive our Most Popular Blog of the Day