अजीब सी लगती है यह ज़िन्दगी
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|   Aug 10, 2017
अजीब सी लगती है यह ज़िन्दगी

"" अजीब सी लगती है यह ज़िन्दगी ""

क्यों कोई हमारी ज़िन्दगी में आता है, अगर आता है तो क्यों उसका साथ छूट जाता है, अजीब सी लगती है यह ज़िन्दगी ।

कभी किसी को पास तो कभी किसी को दूर करती है यह ज़िन्दगी, कभी किसी को हसाती तो कभी किसी को रुलाती है यह ज़िन्दगी, अजीब सी लगती है यह ज़िन्दगी ।

कभी छाया तो कभी धूप सी है यह ज़िन्दगी, पता नहीं क्यों इतनी अजीब सी पहेली है यह ज़िन्दगी, कभी मीठी तो कभी कड़वी सी है यह ज़िन्दगी, अजीब सी लगती है यह ज़िन्दगी । 

 कभी उजाला सा दिन तो कभी अँधेरी सी रात है ये ज़िन्दगी,कभी अजनबी को दोस्त तो कभी दोस्त को अजनबी बनाती है यह ज़िन्दगी,न जाने क्या चाहती है यह ज़िन्दगी,अजीब सी लगती है यह ज़िन्दगी ।

न जाने क्यों नाराज सी है यह ज़िन्दगी, न जाने क्यों सताती है ये ज़िन्दगी, न जाने क्या चाहती है ये ज़िन्दगी, अजीब सी लगती है ये ज़िन्दगी ।

क्यों लेती है इतने इम्तिहान यह ज़िन्दगी, क्यों नहीं संभलती ये ज़िन्दगी, क्यों रेत सी फिसलती है यह ज़िन्दगी, अजीब सी लगती है यह ज़िन्दगी ।

हर दिन नया रंग दिखाती है यह ज़िन्दगी, हर रोज नए मोड़ पर खड़ा कर देती है यह ज़िन्दगी, क्यों इतनी अजीब सी लगती है तू ज़िन्दगी, बहुत शिकायते है तुझसे ज़िन्दगी, कभी फुर्सत मिले तो देना मेरे सवालो के जबाब तू ज़िन्दगी, क्यों है तू इतनी अजीब ज़िन्दगी ।

कभी तो मोका देती सँभालने का तू ज़िन्दगी, क्यों इतनी कठोर है तू ज़िन्दगी, कभी तो मेरे सवालों का जवाब दे ज़िन्दगी, क्या चाहती है तू ज़िन्दगी, क्यों अजीब सी लगी है तू ज़िन्दगी ।

ज़िन्दगी हमसे नाराज है फिर भी हमारे होठों पर मुस्कान है, कुछ तो बात है तभी तो हर रोज एक नया दिन साथ है, फिर भी मेरे बहुत सवाल है, न जाने कहा मेरे जवाब है,क्या चाहती है तू ज़िन्दगी,अजीब सी लगती है तू ज़िन्दगी ।

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