मुझे न छुना 
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|   May 09, 2017
मुझे न छुना 

समय तेजी से भागता है ,और दे जाता है बहुत सी यादें ,कुछ अच्छी कुछ बुरी ! जब इन यादों की साल गिरह आती है तब हम उन्हे याद कर लेते हैं ,एक रीवाज की तरह | अब तो याद दिखाने के भी कई तरीके हैं ,फेसबुक ,टवितर ,और भी कई !!अच्छी याद तो खुशी की पोस्ट और दुख भरे पलों के लिये भी पोस्ट |

एेसी ही एक याद के नाम पर चार लोगों को फांसी की सजा हुई और हम बीना सालगिरह के ही पोस्ट करने पर मजबूर हो गये |

एक बेटी ने जान खोई और हमने उसे पोस्ट बना दिया |

इज्ज़त खोई ??

 नहीं इज्ज़त, हमने खोई ,हर आदमी ने इज्ज़त खोई , हर औरत ज़िसने बेटे को जन्म दिया उसने इज्ज़त खोई ,क्योंकी हम आप मिला कर ही वो समाज बनाते हैं जहाँ कार्यवाही नहीं पोस्ट होता है !!! एक लडकी जिसे अपने देश ,अपने शहर मे खुले आम घुमने की सजा मिली !!

क्या उसने छोटे कपड़े पहने थे ?? नहीं !

क्या वो कोई अशलील हरकत कर रही थी ??नहीं !!

क्या वो नशे मे थी ?? नहीं भाई नहीं !!

वो सिर्फ लडकी थी !!

उसे टोंट करना ,छेडना ,घूरना ,हमारा मनोरंजन है और उसे छू लेने का हमे हक है !!!

छू लेना !! 

मानो शोरुम मे रखा कोई पुतला हों ,अच्छा लगा, हाथ फेर लिया !

कभी सोचा है ,घूरती आँखे भी यूँ छूती सी महसूस होती है ,तो कोई अंजान राह चलता छू कर चला जाये तो क्या महसूस होता होगा ??

कुछ और हों ना हों घ्रणा और रोष ज़रूर महसूस होता है !

कभी न कभी हम सबने शायद वो अंजान हाथ अपने ज़िस्म पर महसूस किया होगा | चेहरा तो याद नहीं ,शायद दिखाई भी ना दिया हो किंतु वो पल की दहशत ,और गुस्सा शायद ही भूला हो ??

क्या है वो मानसिक सोच जो औरत को इंसान नहीं समझने देती ?? क्या है वो वजह की राह चलता, औरत को घूरने ,छेड़ने और छूने को मज़ा समझता है ??

डर की कमी !!!

जी हाँ , हमारे सभ्य समाज मे अराजक तत्वों से डर लगता है ,उन्हे समाज और प्रसाशन से डर नहीं लगता !!

हमारे यहां घ्रिनीत अपराध करने वालों के लिये वकील मिलते हैं ,और तो और,वो उम्र और मासुमियत के हवाले से उनको छूडवा भी लेते हैं !

कानुन की इतनी दलीलें दि जायेंगी की स्वयं खुद से भरोसा उठ जाता हैं |

उन चार को फांसी की सजा हुई ,मगर मैं इन्तजार मे हूँ की कोई उनका हमदर्द ,नयी दलील ले कर माफी की अपील ज़रूर करेगा !

और वैसे भी एक नाबालिग तो सजा से बच ही गया ,बच्चा जो था वो !!

अल्हडता मे कर गया अपराध जिसके बारे मे सोच कर रूह कांप उठती है !

कैसे समाज का हिस्सा हैं हम ??

एक विकृत मानसिकता को एेन केन प्रकारेन सही ठहरा देते है ??

क्योँ नहीं एक बार खुले आम फांसी दी जाती ?

क्योँ नहीं एक एेसा डर बनाया जाता ,जहाँ अपराध करने से पहले सजा का भय हो !

बचपन से कूट कूट कर हर लडकी के दिमाग मे भर दिया जाता है ,उसे कैसे चलना है ,कैसे बैठना है,कैसे बोलना है ,और हाँ कितना और कब बोलना है ! सर झुका कर नजरें निची रखो !

घुटने से निचे हो कपडे तुम्हारे !

गलती से भी ब्लाऊज़ ,टोप या कुरती का गला बडा ना हो !

ऊँची आवाज नहीं होनी चाहिये !

यूँ खुले आम मत हंसो !

अपने विचार अपने अन्दर रखो ,बोलने की आवश्यकता नहीं !

किसी भी पुरूष से विचार मेल ना खाये तो ,तुम झुक जाओ !

शाम सात बजे और कही कही तो छे बजे के बाद घर से नहीं निकलो !!

क्यों ???

क्योंकी शाम सात बजे के बाद ,हमारे लडके बाहर आते है ज़िन्हे हमने कोई बंधिश, कोई डर नहीं दिखाया !

ज़िन्हे हम समाज की परिभाषा मे पुरूष प्रधानता का मतलब समझाते हैं नारी सम्मान का नहीं !

क्यों नहीं उन्हे कहते की नजरें निची रखो !

आवाज़ मे छीछोरापन ना हो !

दूसरे के विचार की इज्ज़त करो ,उसकी हाँ और ना का सम्मान करो !!

आधा समाज एक डर मे जिये ,ये कहां का इंसाफ है ?

कब तक लडकी को लडकी होने का अपराध बोध करायेंगे ?

कब हम अपने बेटों को पुरूष होने से पहले इंसान होना सिखायेंगे ?

कब उसे नारी के भी इंसान होने का एहसास करायेंगे ??

कब उसका पुरूषत्व नारी की ना का सम्मान करना सिखेगा ?

कब नारी को छूने का अधिकार सिर्फ उसका अपना होगा ,उसे राह चलते कभी आँखों से ,कभी शब्दों से तो कभी हाथों से छूने की कोशिश नहीं होगी ?

दिमाग को झकझोर देते हैं ये सवाल !

किंतु कडवा सच हैं !

सच को स्वीकार करना होगा और एक कोशिश भी करनी होगी ,बेटियों की बंधिश तोडने की ,और लड़को पर बंधिश ड़ालने की !!

सिर्फ पोस्ट मत करें ,बेटियों को मजबूत बनाये और बेटों को ,मजबूत बेटी का सम्मान करना सिखायें |

समाज हम आप से बनता है ,बदलाव की शुरुआत आप करें |

एक बार ज़रूर सोचे ,अगले ब्लोग तक ...लाइक व फोलो करें !

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