बंदे अच्छे हैं।
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|   Apr 27, 2017
बंदे अच्छे हैं।

घर में बारात की तेयारी ज़ोर शोर से हो रही थी । सभी घर की लेडीज तक पार्लर से तैयार हो के आ चुकी थी । तभी हमारे diffence वाले जीजाजी (जो के इतने बड़े परिवार मे अकेले वक़्त के पाबंद थे) ने पूछा "अरे भाई ये बेंड़ वाले क्यूँ नहीं आए अभी तक"? और जब बेंड़ वालो को फोन किया गया तो पता चला के आज किसी शादी की बुकिंग ही नहीं है और जिन जनाब की आज की शादी है वो तो ख़ुद से ही 7 अप्रैल की बुकिंग करा के गए हैं 6 अप्रैल की नहीं । फिर बड़ी मिन्नते करने के बाद जैसे तैसे बेंड़ आया और मेरे पतिदेव बारात ले कर आए ।

वरमाला और सब रस्में हो हँसी ख़ुशी हो चुकी थी फिर आया फेरों का समय और जब माँग भराई के समय पंडित जी ने दुल्हे से अपने हाथ की अँगूठी निकाल के माँग भरने को कहा तो ये क्या अँगूठी तो थी ही नहीं वो तो ये नहाते हुए बाथरूम में ही भूल आए थे । ख़ैर ये रस्म भी निबटा ही ली गई और फिर शुरू हुई ज़िंदगी इन महाशय के साथ जिन्हें अपने business की हर छोटी बडी बात याद रहती है मगर बाक़ी सब भूल जाते है।जिनको अपना फोन नम्बर, जन्मदिन, शादी की साल गिरह मुझे पहाड़े की तरह याद कराना पड़ती है और हाँ कभी कभी surprise test की तरह सुननी भी पड़ती है । आज anniversary पे घर में सभी मज़ाक़ करते हैं 6 को विश करना है या फिर 7 को ? कभी यूँ हीं मज़ाक़ में बोल दो आप को आज का दिन भी नहीं याद तो बेचारे घबरा जाते हैं के अब मैं क्या भूल गया। ऐसे बहुत से क़िस्सों के साथ ये ज़िंदगी यू हीं गुनगुनाते हुए बहुत ही ख़ूबसूरत अन्दाज़ में निकल रही है।

"दिल के पूरे बच्चे हैं पर बंदे अच्छे हैं ।

भूल भाल जाते हैं थोड़े कच्चे हैं पर बंदे अच्छे हैं। इनकी आदतो के हज़ार क़िस्से हैं पर बंदे अच्छे हैं।"

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