माँ !शब्द ही सब कुछ है ।।।
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|   Mar 01, 2017
माँ !शब्द ही सब कुछ है ।।।

माँ शब्द ही एक ठंडी छाँव है।माँ वो हैं जिसके आँचल मे हमारे सारे दर्द हम भूल जाते है ।माँ दुनिया का सबसे खुबसूरत एहसास है।इस दुनिया मे हमारा सबसे पहला परिचय है माँ और हर बेटी को अपनी माँ से प्यार दुगना हो जाता है जब उसकी शादी होती है और जब वो स्वंयम माँ बनती है। कुछ पंक्तियाँ  मेरी माँ और दुनिया की हर माँ को समर्पित।

       माँ

अरे! पाँच बज गए,   घड़ी की घंटी बजी,

 हम फिर जग गए ।

रोज़ भोर के साथ, शुरू होता है नया दिन, 

फिर वही चौका, वही किचन ।

दिन चढ़ आया,

सूरज गहराया,और पतिदेव ने फरमाया 

                    'चाय'

मन ने कहा 'ना' आज आप बनाए, 

फिर बेमन हमने,रोज़ के काम दोहराए । 

चाय, खाना,बच्चे, अपने और पराये 

सब को संभाल, जब मन ने कहा थोड़ा सुस्ता ले, खुद पर वक्त बिता ले,

तो माँ के साथ बिताए, सब पल याद आए।

मै भी अपनी माँ पर हुक्म चलाती थी, 

पिक्चर देखकर खुद आती,

एहसान उस पर जताती, 

कभी-कभी जिद कर, 

माँ को सताती,

 खाने मे कोई नुक्स निकाल कुछ और बनवाती।

हँस कर माँ सब पूरा करती,हमारे सारे नखरें सहती,

कभी कुछ ना कहती।

उसकी हर मुश्किल, हर जरूरत, मैं अब समझती हूँ, 

आज खुद को उसी के साथ के पलड़े मे रखती हू ।

फिर भी माॅ के हिस्से का काम बहुत ज्यादा है, 

 मेरे हिस्से मे तो बिल्कुल आधा है, 

अब सूरज लाल होने लगा है,पंछी भी घोंसले मे सोने लगा है ।

कल फिर नया दिन, नया सवेरा होगा।

पर माँ क्या है यह पता चल गया है, 

आज उसके हिस्से का जीवन, मेरे हिस्से का बन गया है ।।।।।

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