वह आँखें क्या बोलती है?(On this fathers day dedicated to all loving fathers who are not expressive)
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|   Jun 16, 2017
वह आँखें क्या बोलती है?(On this fathers day dedicated to all loving fathers who are not expressive)

मेरी शादी को कुछ ही दिन बाकी थे घर में नजदीकी रिश्तेदार आने जाने लगे थे।मेरी सहेलियों और बहनों के ठहाकों से पूरा घर गुंजायमान रहता था।

हर कोई अपने-अपने सुझावों की लड़ी बिखेरे रहता था।

खरीदारी जोर-शोर पर थी, इन्ही सबके बीच मेरे पिता, जो स्वभाव से बिल्कुल expressive नहीं है,जो किसी भी बात को शब्दों में बयां नहीं कर पाते ,आते -जाते, जहां भी मैं बैठी होती थी, मुझे देख कर चले जाते थे। 

कभी कभी मां से कहते, उससे पूछ लो कोई और सामान तो नहीं खरीदना उसे?

हमारे घर में सभी को उनसे यह शिकायत रहती है कि अच्छी बुरी किसी भी बात पर उनकी कोई प्रतिक्रिया नहीं होती।

 शायद यह उनकी प्रकृति है (nature)है। 

 वह अपनी भावनाओं को शब्दों में बयां नहीं कर पाते। आज जब मै, उस वक्त का ,उनका चेहरा और आंखें अपनी नज़रों के सामने लाती हूं तो उनकी आंखों का हर शब्द, हर भाव समझ सकती हूँ ।

 वह आंखें क्या कहना चाहती थी?उस अल्लहड़ उम्र मे मैं पढ़ नहीं पाई,मगर अब स्पष्ट समझ आता है।

 शायद उनकी आंखें मुझे करोड़ों आशीर्वाद देना चाहती थी ।

उनकी आंखें कहती थी मैं उन की बगिया कि वह चिरैया हूं जिसके जाने के बाद उनका आंगन सूना हो जाएगा।

 उनकी आंखें कहती थी वह मुझे कितना प्यार करते हैं और अपने जिगर के टुकड़े को किसी और को सौंपने में उन्हें कितनी तकलीफ हो रही है।

उनकी आँखें मुझे खुश देखकर मुस्कुरा उठती थी।

 उनकी आंखों का हर शब्द में आज समझती हूं और अब उनके चेहरे का हर भाव पढ़ लेती हूं ।

आज उम्र के इस पड़ाव पर जिंदगी ने मुझे अनजान लोगों के चेहरे भी पढ़ना सिखा दिया है,वहां अपने पिता की हर बात, हर भाव, मैं उनके बिना कहे ही समझ जाती हूं।

  पिता वह इंसान होते हैं जो अपनी खुशी से बढ़कर अपने बच्चों की खुशियां चाहते हैं,वह हमारी जिंदगी के सारथी होते हैं, वह हर दुआ मे हमारा भला सोचते हैं, चाहे फिर वह अपनी भावनाओं को,अपने जज्बातों को जुबां से बयां कर पायें या ना कर पायें।

हम सभी के घर में कोई ना कोई  ऐसे सदस्य होते है जो शब्दों से अपनी भावनाएं व्यक्त नहीं कर पाते, मगर इसका मतलब यह नहीं कि वह आपको प्यार नहीं करते या वह आप की कद्र नहीं करते।

 उन से शिकवा या शिकायत ना रखें,यह उनका स्वभाव है ,शायद प्रकृति ने उन्हें इसी तरह बनाया है और इसीलिए लाख कोशिश करने के बाद भी वह जज्बातों को जुबान नहीं दे पाते।

 इसलिए आप उनकी आंखें पढ़ना सीखिए आपको सब समझ आ जाएगा।

 आंखें सब बोलती है ,

 दिल की हर बात खोलती है,

 आंखें सब बोलती है।

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