ज़िंदगी- एक पहेली
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|   Feb 17, 2017
ज़िंदगी- एक पहेली

अगर किसी से ज़िन्दगी के बारे में पूछा जाए कि ज़िन्दगी क्या है?? तो कोई कहेगा कि ज़िन्दगी एक जुआ है जिसे जितना खेलो उतना मज़ा आता है

कोई कहेगा कि ज़िन्दगी एक जाम है जिसे जितना पियो उतना ही नशा ज्यादा चढ़ता है तो कोई कहेगा ज़िन्दगी एक किताब है  जिसमे हर रोज़ एक नया पन्ना जुडता है। अरे किसी की छोड़िये अगर मैं आप से पुछु के जिन्दगी क्या है तो  शायद आपका नज़रिया कुछ और होगा......

सच कहूं तो ज़िन्दगी एक पहेली है जिसकी तुलना किसी से नही की जा सकती और शायद न ही दुनिया मे ऐसे शब्द हैं जो इसे ब्यान कर सकें। ज़िंदगी एक एहसास है..

आज इस topic पे कुछ लिखने का लक्ष्य आपका ज़िंदगी के उस पहलू से परिचय करना है जिसे आप सच मुच जीते हैं पर उसे जान या पहचान नही पाते..

अगर आप अपने चारों और शांत मन से नज़र घुमा के देखें तो आपको जीवन के कई रूप पता चलेंगे फिर वो चाहे एक रंग की हुई दीवार पे लटकी एक घडी क्यों न हो...जो हमे निरन्तर काम करने की सीख देती है...या फिर एक छोटा सा बच्चा जो अपने चंचल मन के साथ खिलौने के पीछे भागता है और उसे पाकर इतना खुश होता है जिसकी आप कोई कीमत नही लगा सकते। ऐसी छोटी छोटी बातों में उन प्यार के कुछ लम्हो में नन्ही शरारतों में हँसी में ही तो है असली ज़िन्दगी।

बस इतना कहना चाहूंगी कि ज़िन्दगी को सिर्फ एक नज़रिये से मत देखिये क्या पता.... उसे दुबारा देखने पे आपका नज़रिया बदल जाये। ज़िन्दगी का असली मज़ा तो उसे ज़ी भर के जीने में है अपनों के साथ में है।

Dedicated to my dear bro - Ankush

Dear freinds please आप अपने अंदाज़ में इस लाइन को कम्पलीट करें..-ज़िन्दगी क्या है…............. और इन में से 5 को अपने next blog में publish करूँगी with your name.

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