उसने उसका रोना नहीं सुना क्योंकि वो अंग्रेजी में नहीं रोई थी !!
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|   Jan 19, 2017
उसने उसका रोना नहीं सुना क्योंकि वो अंग्रेजी में नहीं रोई थी !!

इंग्लिश विंग्लिश " फ़िल्म देखी है !!! थोड़ी पुरानी हो गयी है पर अगर नहीं देखी तो जरूर देखियेगा ...खासकर तब जब आप अंग्रेजी नहीं बोल सकती हैं ...  बात सिर्फ महिलाओं पर लागू नहीं होती उन पुरुषों को भी ये फ़िल्म देखनी चाहिए जिन्हें "अंग्रेजी " के कारण कई बार निराशा हाथ लगी ... 

जाहिर है आपको फ़िल्म देखने की सलाह मैं अचानक यूँ ही तो नहीं दूँगी ...कुछ चुभन तो है जो साझा करना इसलिए भी जरुरी है ताकि उस हिंदी भाषी लड़की का आत्मविश्वास ना खो पाये ...

मेरी दोस्त नहीं पर अंजान से रिश्ते में जुड़ी एक लड़की का जब अंग्रेजी को लेकर रोना सुना तो उसे भी तसल्ली के लिए फ़िल्म देखने की सलाह दे दी....

उसका कहना था कि उसका पति उसको सिर्फ इसलिए बुरा भला सुनाता है क्योंकि उसे "अंग्रेजी " नहीं आती ... बड़ा अजीब सा झगड़ा था ये अंग्रेजी वाला 

तमाम बुरी भली बातों के साथ-साथ उससे बोला जाता है ...

" मेरे दोस्तों से कैसे बात करोगी अगर अंग्रेजी नहीं आती "

"बाहर देश कैसे रहोगी अगर अंग्रेजी नहीं आती "

नहीं आती ...तो सीखो ...!! आजकल अंग्रेजी के बिना कुछ नहीं //////

वो सिसकती रही पर अंग्रेज पति को उसका रोना भी नहीं सुनाई दिया ...

शायद इसलिए क्योंकि वो "अंग्रेजी " में नहीं रोई थी 

इस गंभीर बात को मैं मजाक में लिखकर आपको हँसा तो रही हूँ पर मैं समझ सकती हूँ वो क्या महसूस करती होगी ...खासकर तब जब हमबिस्तर होते हुए भी पति -पत्नी का रिश्ता सिर्फ "अंग्रेजी " पर जो टिक गया हो !!! 

औरतों और लड़कियों के लिए ये अंग्रेजी वाला चैप्टर कोई नई बात नहीं ... 

छोटे शहर के हिंदी मीडियम स्कूलों में पढ़ने वाली लड़कियों की शादी अगर गलती से "हिंदी वाले इंग्लिश मैन " से हो जाये तो कभी -कभी लड़की की फज़ीहत यहीं से शुरू हो जाती है ...शायद कुछ ऐसा ही उसके साथ हो रहा था ... 

पति की देखभाल करना , उसके लिए खाना बनाना ,उसके परिवार का ख्याल रखना और पति की सारी जरूरतों को पूरा करने के बाद भी रात को सौगात में उसे गालियों की तरह चुभने वाली बातें ही सुनने को मिलती है ...खास बात है कि उसमे "अंग्रेजी " बड़ा मुद्दा हो है ...

अरे वही अंग्रेजी जो अंग्रेज चले गए और हमारे पल्ले छोड़ गए ... लेकिन विडम्बना ये है कि इस अंग्रेजी का भी अपना मज़ा है ... जिसको आती है आजकल उसे ही पढ़ा लिखा समझ जाता है ...

"इंग्लिश वाले रेस्पेक्टेड लोगों " इसमें दरअसल अंग्रेजी भाषा का कोई कुसूर नहीं ...हर भाषा सम्माननीय है और सीखने और बोलने योग्य भी ... पर शायद आप लोग ही निश्चय किसी योग्य नहीं जो भाषा का रौब झाड़कर खुद को पढ़ा -लिखा महसूस कराते हैं .

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