ये कैसा आशीर्वाद
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|   Aug 03, 2017
ये कैसा आशीर्वाद

बहुत ही छोटी उम्र में उसे प्यार हो गया था सच्चा वाला प्यार।निशा उसे ही अपनी ज़िंदगी समझती थी।लेकिन उसने तो न सिर्फ उसके शरीर का बल्कि उसके प्यार का,उसके अरमानो का,उसके सपनो का उसके विश्वास का बलात्कार कर दिया।लेकिन फिर भी वो नही टूटी,उसे लगता था उसने सच्चे प्यार का एक मिसाल दिया है।उसे लगता था की रंजन सिर्फ उसका है।वो उसका साथ ज़रूर निभाएगा।

और उसका विश्वास जीत गया,रंजन ने उसका साथ दिया जब वो 22 साल की उम्र में जब रंजन ने उसे गर्भवती किया था।रंजन ने बहुत ही अच्छे gyno से उसका एबॉर्शन करवाया था,और हा एक वायदा भी किया था शादी करने का।

लेकिन निशा को नही पता था,ये वायदा उसके लिये नही है।और वही हुआ जो होता आया है।रंजन निशा की ज़िन्दगी से गायब हो गया।

कभी कभी उड़ती फिरती खबर निशा को रंजन के बारे मे मिल जाती थी।और वो उसमे ही खुश रहती थी।ऐसे ही एक उड़ती खबर निशा को मिली कि रंजन की शादी ही।निशा बदहवास सी रंजन को ढूढ़ने लगी।उसे खबर मिली कि रंजन हमेशा के लिये दिल्ली जा रहा है।अपने दोस्तों की मदद से निशा उससे मिलने स्टेशन गयी।वहाँ उसे रंजन मिला लेकिन वो उसका नही था। रंजन ने निशा से कहा हमारे बीच कुछ भी नही था और अगर तुमको लगता है कि कुछ था तो ये तुम्हारी गलती ही।

निशा रंजन के बातो को दोहराती है हमारे बीच कुछ नही था।आँसू उसके आँखों से बह रहे थे।दिल मे असहनीय दर्द हो रहा था। वही खड़े होकर रंजन को अपनी ज़िंदगी से दूर जाते हुए देखती रही।

समय  बीत गया पर निशा के दिल मे अभी भी रंजन ही धड़क रहा था।खैर निशा को भी कोई चाहने वाला मिल गया था रवि -उसका पति।ज़िन्दगी अच्छी चल रही थी दोनो की।सब भूल तो नही पायी थी निशा लेकिन कही मन मे दबा लिया था।

शादी के एक साल बाद निशा एक बेटी की माँ बन गयी।ज़िन्दगी रवि के साथ हँसी खुशी बीत रही थी।

अचानक एक दिन उसके सामने रंजन आ गया।10 साल के बाद वो उससे देख रही थी।उसके दिल की धड़कन तेज़ चलने लगी।इससे पहले वो कुछ कहती रंजन ने कहा निशा ये ही मेरी वाइफ पूजा और ये मेरी बेटी पीहू।और वो कहते चला जा रहा था।उसने अपनी वाइफ से कहा हम और निशा बहुत अच्छे दोस्त थे।हमलोग एक ही कॉलोनी में रहते थे और पता नही क्या क्या झूठ वो बोले जा रहा था।

निशा चुपचाप उसकी बातें सुनती रही।उसने पूजा से कहा आपसे मिलकर अच्छा लगा।बचपन के दोस्ती है मेरी और रंजन की।आपकी बेटी बहुत प्यारी है।फिर वो उसकी बेटी के पास गई और बोली- बेटा हमेशा खुश रहना।और फिर रंजन के तरफ देख के बोली रंजन तुम्हारी बेटी बहुत प्यारी है।इसके चेहरे की मुस्कान हमेशा बनी रही।भगवान करे इसकी ज़िन्दगी में कभी कोई रंजन नही आये।रंजन अवाक होकर निशा को देखता रह गया।

रंजन से नज़र मिलाते हुए आगे निकल गयी।आज निशा के दिल अजीब से ठंडक थी और एक शकुन भी।रंजन को उसने जो आजतक नही कहा था आज उसने कह दिया था।

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