इंजिनियरिंग या भेड़चाल..
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|   May 16, 2017
इंजिनियरिंग या भेड़चाल..

हमारे भारतीय समाज में अधिकतर परिवारों में यह धारणा है कि अगर किसी पड़ोसी या रिश्तेदार का बेटा इंजीनियर है और अच्छी सैलेरी प्राप्त कर रहा है तो हमारा बेटा भी इंजीनियर बने। । उनके अनुसार अगर बेटा इंजीनियर बन जाए तो गंगा नहा जाए। लेकिन हकीकत इसके बिल्कुल उलट है। 

मानव संसाधन विकास (HRD)मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार भारत में 6000 से अधिक  इंजिनियरिंग कॉलेज हैं जहां हर साल लगभग 25-27 लाख बच्चे एडमिशन लेते है। भारत विश्व में सर्वाधिक इंजीनियर प्रोड्यूस करने वाले देशों में से हैं।आप अंदाजा लगा सकते हैं कि इंजिनियरिंग कॉलेज केसे कुकुरमुत्ते की तरह बढ़ रहे हैं और इंजीनियरो की बाढ़ सी आ गई है। ये आंकड़े चौंका देने वाले हैं क्युकि इतनी संख्या में सालाना नौकरी मिलना असंभव है और इन इंजीनियर की क्वालिटी भी खराब ही है।  अतः सिर्फ़ 40 प्रतिशत से भी कम लोगों को ही रोजगार मिल पाता है और बाकी के 60 फीसदी से ज्यादा लोग बेरोजगारी झेल रहे हैं। इनमें 60 फीसदी का मतलब लगभग 15 लाख लोग सालाना नौकरी के लिए धक्के खा रहे हैं। उनकी हालत इतनी दयनीय है कि वो लोग चपरासी की नौकरी के लिए भी आवेदन कर रहे हैं। एक सर्वे के मुताबिक इन पास आउट इंजीनियरों में से केवल 10 प्रतिशत ही इंजिनियरिंग का काम करने के काबिल है। इससे आप अंदाजा लगा सकते हैं कि किस तरह दिन ब दिन इन इंजीनियरों की क्वालिटी गिर रही है। हमारी शिक्षा व्यवस्था कितनी लाचार हो रही है और बेरोजगारी किस हद तक बढ़ रही है।सरकार ने इस मामले में 'स्टार्ट उप इंडिया' योजना से नए उद्योगों के लिए कई कदम उठाए हैं इसमे युवाओं को प्रोत्साहित किया गया है, लेकिन वह कुछ कम ही कारगर साबित हो पाए हैं। आज के समय में ये इंजीनियर बेटे परिवार के गर्व के नहीं बल्कि चिंता का विषय बन गए हैं। 

क्या इससे बेहतर यह नहीं कि समाज को अपनी सोच बदल कर कुछ दूसरे विकल्प चुनने चाहिए जिससे बेरोजगारी की दर कम हो सके।

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