"चांद " छुपा  "बादल" में..... 
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|   May 18, 2017
"चांद " छुपा  "बादल" में..... 

"चादँ" छुपा "बादल "में....         भाभी आज गाना नाहीं बजौ.. 'कौन सा? 'अरे! वाहे जो रोज शाम होत बजन लगत है.. "चादँ छुपो बादल में और मेरे सामने वाली खिड़की मे एक चादँ को टुकड़ा रहता है। हम्म!! लाइट नहीं आ रही होगी आज शायद तभी न बज रहा हो.. अरे नहीं भाभी... आज आप जो नाय गयी शाम को छत पर टाहलन । हा ह् हा ह् हा.. बक्ख!! ऐसा थोड़े न होता है।मैंने अपनी कामवाली दीदी को बीच में ही टोका... अरे!! नाही भाभी सच मे अइस्सो ही है।अच्छा आप अभय छत पे जाओ फिर दिखय्यौ तुरन्त कैइसे गाना बजन लगत है.. और फिर वो मुझे घसीटते हुये छत पर ले गयी और ये क्या सच में मेरे आते ही गाना बजने लगा। जैसे कोई मेरे आने के इन्तजार मे बटन पर हाथ रखा हो.. मुझे देखते ही दवा दिया हो और गाना शुरू.... पर फिर भी मैंने अपनी कामवाली को बोला हो सकता है दीदी ये बस इक इत्तेफाक हो । ठीक है भाभी तुम नाय मनती तौ नाय मानौ पर हैय तो जाय बात। भाभी तुम कुछ दिन करके दैखौउ जौउ फिर तुमही खुदहई पता चल जई कि क्या बात है... अच्छा बाबा ठीक है.. देखते हैं।फिर अगले दिन रोज की तरह शाम को जैसे ही मैं छत पर गयी फिर वही गानें बजने लगे... चादँ छुपा...एक-दो दिन तो मुझे इत्तेफाक लगा पर ये क्या!! जिस शाम मै नहीं जाती उस शाम वो गाने नहीं बजते।पर हैरत की बात ये थी कि जिस बात को मैंने नोटिस नहीं किया उस बात को मेरी कामवाली ने नोटिस कर लिया खैर जब मैं खुद मे कन्फर्म हो गयी तो रात होते ही जैसे पतिदेव आफिस से घर आये मैंने उनको सारी बात बताई पर उन्होंने भी मेरी बात को मजाक मे ले लिया और बोले... क्या बात है मेरे चादँ पर सबकी नजर है.. मैं मजाक नहीं कर रही यार... सच कह रही हूँ।आप कुछ दिन अपने आफिस से जल्दी आइए और फिर देखियेगा आकर खुद । और जब पतिदेव ने भी दो-तीन तक यही सब देखा कि मेरे जाते ही छत पर शाम को गानें बजने लगते और न जाने पर नहीं.. तो पतिदेव अगले ही दिन सुबह -सुबह उसके घर पहुंच गये और उससे बोले क्या बात है भइया आजकल शाम को बहुत चादँ देखा जा रहा है,, नहीं,, नहीं तो भइया ।अरे नहीं तो क्या,, इसमें घबराने और शरमाने बाली क्या बात है हमनें भी किया है ये सब बहुत चलो आज तुमको दिन मे ही चादँ दिखा लाते हैं और फिर पतिदेव उसको घर ले आए और मेरे सामने ला कर के उससे बोले लो अब दिन में ही चादँ देखो और वो भी पास से,, नहीं नहीं भइया ऐसी कोई बात नहीं है मुझे काॅलेज जाना है देर हो रही है।अरे चले जाना पहले आज चादँ को तो देख लो अपने जी भर के रोज -रोज इतनी दूर से देखते हो... आज दिन मे और पास से देख लो... नहीं... नहीं भइया वो मुझे कहीं जाना है... अरे! रूको तो.... और फिर वो अपनी जान छुड़ा कर ऐसे मेरे घर से ऐसे गायब हुआ जैसे गधे के सर से सींग।शाम को जब मैं रोज की तरह छत पर टहलने गयी तो कामवाली दीदी बोली आज भाभी गाना नाय बजो"चादँ छुपा बादल में "दीदी अब वो कभी बजेगा भी नहीं क्योंकि अब सचमुच चादँ बादलों मे छुप गया है.... और फिर मैंनें आसमान में चन्दा मामा को देखा और मुस्करा दी और गुनगुनाने लगी.... चादँ छुपा बादल में....

       ख्वाहिश....... 😊

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