"इश्क "वाला "लव"
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|   May 04, 2017
"इश्क "वाला "लव"

"इश्क " वाला "लव"आओ सुनाऊँ प्यार की इक कहानी... एक था लड़का एक थी लड़की दिवानी....

 दोनों की मुलाकात एक वाटस्पॅ के गुरुप में हुई.. और फिर एफ बी पे, कब ये दोस्ती प्यार में बदल गई पता ही नहीं चला। अब रोज घन्टो वाटस्पॅ और मैसैन्जर पर बातें होने लगी । समय के साथ-साथ उन दोनों का प्यार भी गहरा होता गया ।बस एक उल्फत थी कि छ: महीने होने को आये पर दोनों ने इक-दूसरे को देखा तक नहीं था.... कारण दोनों दो अलग-अलग शहरों से थे ।बड़ी जद्दोजहद के बाद दोनों का मिलना हुआ.... उफ्फ गजब का दिन था वो... उसके बाद हर मुलाकात के बाद अगली मुलाकात का इन्तजार..... दोनों मिलने के बहाने ढूँढने लगे.... नव के लिए इतना मुश्किल नहीं था मिलना.. पर नैना के लिए बार-बार घर पे झूठ बोलना... उसको समझ मे नहीं आता कि वो नव से कैसे मिले । नव और नैना जितना दूर थे उतना ही मन से पास । दोनों बहुत झगडते, गुस्सा करते एक-दूसरे पे, उनको कभी-कभी ये भी नहीं याद रहता कि वो गुस्से मे एक-दूसरे को कितना हर्ट कर रहे हैं... वो कहते हैं न कि हम गुस्सा भी सबसे ज्यादा उसी पे करते हैं जिससे हम सबसे ज्यादा प्यार करते हैं..इसलिए कभी नव नैना को यह कहकर मना लेता कि "गुस्सा तेरा झूठा सनम" तो कभी नैना नव को "पगलू" कहकर मना ही लेती ।जान बसती है दोनों की एक-दूसरे में.. दोनों आज फिर दोनों रुठे हैं इक दूसरे को मनाने के लिए..... 

"वो पल में बीते साल लिखूं,या सदियों लम्बी रात लिखूं.....मैं तुमको अपने पास लिखूं या दूरी का एहसास लिखूं 

   मुझे इश्क है "खुद " से  

मुझे इश्क है अपनी "सांसों " मे महकती "उनकी " खूशबू से 

     मुझे इश्क है अपनें "दिल "मे धड़कती "उनकी "धड़कन से  

     मुझे इश्क है अपनी "बातो" में झलकते "उनके" जिक्रर से 

मुझे इश्क है अपने "दपर्ण" में दिखते हुये "उनके " अक्स से 

मुझे इश्क है अपनी हर उस "सोच " में बसते हुये "उनके" ख्यालों से 

     मुझे इश्क है अपनी "ख्वाहिश " मे "उनकी "बसती हुई ख्वाहिशों से

     मुझे "इश्क " है अपने "इश्क " से..... बेपनाह.. बेइंतहा... 

                                                    ख्वाहिश.... 👸

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