अरे! वह औरतों की तरह रोता है।
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|   Jul 10, 2017
अरे! वह औरतों की तरह रोता है।

ऐसी ही कुछ प्रतिक्रिया होती है लोगों की;जब कोई पुरुष अत्यंत भावुक होता है।औरतों को कमतर आंकने वाले पुरुष ही अधिकतर ऐसी संज्ञा से विभूषित करते पाए गए है।जब कोई उनका पुरुष साथी ईमानदारी से अपने भाव प्रकट करता है।इतना ही नहीं उसे भांति -भांति के उलाहने देकर उसका तिरस्कार किया जाता है।कुछ पूर्वाग्रह से ग्रसित औरतें भी इसमें पीछे नहीं रहती है।

टेलीविजन और अन्य संचार के साधनों में प्रयुक्त विज्ञापन भी इसी धारणा की पुष्टि करते पाए गए है।बेचारा पुरुष करे भी तो क्या करे।इसी धारणा के चलते अधिकतर पुरुष अपनी भावनाओं को छिपा जाते है।वे अंदर ही अंदर कुढ़ते रहते है।क्या करे वह जब आदमी की माचो मेन वाली छवि ही अक्सर भुनाई जाती है

पुरुष स्त्री का अवलंब है;इसी धारणा के साथ उसे पोषित किया जाता है।वह ऐसी ही धारणाओं के साथ बड़ा होता है।क्या एक स्त्री पुरुष का अवलंब नहीं बन सकती?क्यों ऐसा होने पर पुरुषोचित अभिमान को ठेस पहुंँचती है।वर्तमान परिप्रेक्ष्य में मैं कह सकती हूँ कि सभी पुरुष ऐसे नहीं है।कुछ अपवाद भी है।

अपनों की कितनी ही असीमित अपेक्षाओं का बोझ जीवन पर्यंत वहन करते है ये पुरुष।सभी की ख्वाहिशों को पूरा करने की चेष्टा करते रहते है।ऐसे में कितनी ही बार उनका मन व्यथित भी होता होगा जब कभी किसी मोर्चे पर वे असफल होते होंगे।क्या उनका मन रोने का न करता होगा।वे भी रोकर मन हल्का करना चाहते होंगे।

कुछ पुरुष पुरानी धारणाओं के अनुरुप अपने आप को ढाल लेते है।हम पुरुष है इसलिए हम मजबूत ही रहेंगे।हमें किसी भी परिस्थिति में अपरिवर्तित रहना है;ऐसा वे सोचते है।

अक्सर देखा गया है कि नवीन वय के कुछ युवक अपने साथियों को बहकाते है,ऐसे नवयुवक स्त्री का मानमर्दन करना अपनी शान समझते है और दूसरो को भी उकसाते है।वे अक्सर ये कहते पाए गए है "क्या यार कालेज में आ गए हो,कोई गर्लफ्रेंड नहीं है तुम्हारी??अरे नहीं है तो बनाओं।कुछ दिन ऐश करो उसके साथ।यू नो टाईमपास।"

ऐसे युवको को लड़कियों का मन खिलौना लगता है।उसका तन कोई वस्तु लगता है।ऐसे प्राणी कभी भावुक हो भी नहीं सकते।भगवान बचाए ऐसे पुरुषों से।कुछ पुरुष विवाह पश्चात भी ऐसी हरकते करते पाए गए है।अब सोचिए उनकी स्रियों पर क्या बीतती होगी और उन पुरुषों में भावुकता का कितना अंश होगा।होगी तो बस लिप्सा और छद्म आचरण।ऐसे पुरुष के साथ कौन जीवनयापन करना चाहेगा।

मेरा तो यहीं अभिप्राय है कि जो पुरुष थोड़े भावुक है,वे स्त्रियों के मन को भलीभांति समझ पाते है।उसे उचित सम्मान देते है।अपनी पत्नी की बातों को उसके नजरिए से समझ पाते है।ऐसे पुरुष किसी रिश्ते का अनुचित लाभ नहीं उठाते।ऐसे पुरुष हर रिश्ते (मां-बाप,भाई-बहन,दोस्त,सहकर्मी) में ईमानदार सिद्ध होते है।किसी के अरमानों पर पैर रखकर सीढ़ीयां नही चढ़ते है,क्योंकि उनका स्वभाव उनसे अनुचित कर्म करने से रोक लेता है।

आज के युग में जब स्त्री-पुरुष समानता की बाते चल रहीं है।ऐसी बाते करना अनुचित है।बहुत से परिवारों में स्त्रियां जीविकोपार्जन कर रहीं है और पुरुष घर सम्हालतें है।इसका मतलब यह नहीं कि उनका स्तर गिर गया है।हमें अपनी सोच बदलनी होगी।अब आप भी अगर किसी परिस्थितिवश किसी पुरुष को रोता पाए तो यह ना कहिएगा कि अरे!वह तो औरतों की तरह रोता है।

(ध्यान रहे कि मैं स्त्री या पुरुष किसी के भी बेवजह रोने के पक्ष में नहीं हूँ औ��� उनका भी समर्थन नहीं करती जो घड़ियाली आंसू दिखाकर लोगों का अनुचित लाभ उठाते है।)

#मेरी बात

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