अंतर...... माँ औऱ ममता 
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|   May 10, 2017
अंतर...... माँ औऱ ममता 

आज मै खुद से बात करने बैठ गई । जो मै अपनी बेटी से कहना चाहती थी वो मन ही मन ताने -बाने बुनने बैठ गई। बेटू तुम्हारी औऱ मेरी घर से विदाई 18 की उम्र मे हुई । तुम अपने मम्मी पापा के प्यार के साथ अपना जीवन बनाने पढाई के लिए छात्रावास गई औऱ मैं ब्याह कर अपने जीवन की नई पाठशाला ससुराल आई। जहाँ मैं अकेली औऱ सामने पूरा जंग का मैदान ।तुम्हारे पास अकबर औऱ बाबर का इतिहास था पढ़ने को भूगोल दुनिया समझने को, साइंस और गणित जीवन भर की गतिविधियों को समझने के लिए औऱ हिंदी मन की भावनाओं को व्यक्त करने के लिए.....तो वहीं मेरे पास सासू जी का इतिहास था कि हमारे जमाने मे मैंने ये सब किया ऐसे-2किया तो तुम कल की आई इस घर का भूगोल नहीं बदल सकती। तुम्हारे पापा से chemistry बिठाने का वक्त ही नहीं. मिल पाता था क्योंकि सासू जी औऱ ससुर जी की गणित क्यों, क्या ,कब ,कैसे ,कहाँ इतनी कठिन थी कि मैं साइंस और मैथ मे फेल ही होती रहती थी। 

वो तो तुम्हारे पापा इतने अच्छे इन्सान हैं जिन्होंने मेरे जीवन के हर एक  पर्चे को पास होने मे मेरी मदद की। जब तुम कहती हो मम्मी कोर्स बहुत कठिन है extra classes कर के कठिन मेहनत के बाद जब मै कमरे मे आती हूँ तो तुम बहुत याद आती हो , तो वो दिन याद आते जब सास नन्द के ताने भरे बोझिल काम को निपटा के जैसे ही कमर सीधी करने की सोचती थी औऱ निगाह घड़ी पे जाती थी रात के 11 बज रहे होते थे औऱ तुम सोना ही नहीं चाहती थी । तब तुम्हारे पापा तुम्हें अपनी बाहों के झूले मे झुलाते हुए सुलाते थे , औऱ मुझसे कहते सो जाओ फिर तुम्हें सुबह 5:45 पर उठकर 6:15 पर kitchen मे होना है।

जिस तरह तुम लोगों को 7:00 बजे school timing से late होने पर सजा मिलती थी औऱ prayer मे शामिल नहीं होने दिया जाता है उसी तरह मुझे 6:15 से अगर कभी late होकर 6:30 हो जाए तो सासू जी kitchen मे प्रवेश - निषेध का order सुना देती थी औऱ कहती थी ससुर जी के पैर छूकर माफी माँगो की आइंदा ऐसा नहीं होगा ।  

मम्मी ओ मम्मी कहाँ हो ढूढती हुई मेरी प्यारी बिटिया ने अपनी बाहों का हार मेरे गले मे डाल दिया औऱ कहने लगी जल्दी से उतपम बना दो बहुत भूख लगी है .....तब मेरी तंद्रा टूटी औऱ मैंने घड़ी मे देखा दोपहर के 12:30 बजे थे । 

मेरी प्यारी बिटिया जो कि mnc मे job करती है आजकल छुट्टियों मे घर आई हुई है। कुछ समय बाद यानि साल -छह महीने मे जब भी लड़का पसंद आ जाएगा तो उसका ब्याह कर देंगे हम .....पर आज जो हम लोग उससे कहते है बेटू वो (ससुराल)तुम्हारा अपना घर होगा और सास माँ समान होतीं हैं।

इस सच्चे झूठ को कब तक और कितना छुपाऊ मैं 

माँ की ममता बेटे के लिए अलग औऱ बहू के लिए अलग होती है 

यदि बहू मर जाए तो पूरे परिवार को चिंता होने लगती है कि हमारे बेटे का आगे का जीवन कैसे कटेगा औऱ महीना बीतते  न बीतते बेटे का 40-45की age मे भी दूजा ब्याह करवा देते है वही बहू के लिए कहते हैं क्या हुआ पति का नाम लेकर औऱ बच्चों का मुँह देख कर जिंदगी कट जाएगी।

ममता मे अंतर क्यूँ औऱ कब तक.......??????😢

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