अनुभव
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|   Apr 20, 2017
अनुभव

आज मैं आप लोगों के साथ 38 साल पुराने अपने अनुभव बाँट रही हूँ। तब मैं 6 -7 साल की थी। पाँच बुआओ का ब्याह होते और घर बसते देखा है ...अगर ये कहूँ बसते कम , समझौता करते ज्यादा देखा है ,तो गलत नही होगा।

क्यूकि मैंने दादी जी को बेटियों को बस एक जिम्मेदारी समझते ही देखा है। जब तक ब्याह नही हुआ तब तक मायके वाले साथ हैं, उसके बाद बुआ के साथ कुछ भी हो उनके ससुराल वाले जाने।

ज्यादा कुछ नही सोचना, बाकी लड़की की किस्मत ...चाहे मरे या जिये 

सबको यही कहते सुना अब उनकी किस्मत मे ये लिखा था।

अच्छा हो तो माँ बाप ने बड़ा अच्छा रिशता ढूंढा , कुछ गड़बड़ हो तो उस लड़की की किस्मत।

25 साल पहले मेरी विदाई मे मेरे माँ बाप बोले बेटी अब वो ही तुम्हारा घर परिवार है।

अब वहाँ की वहाँ और यहाँ की यहाँ।

मेरी बुआ और मेरी शादी के 13 -14 सालों मे भी कुछ नही बदला बस कहने का तरीका बदल गया जबकि मैं इकलौती बेटी थी। 

आज शादी के 25 साल बाद जब मेरी बारी अपनी बेटी को ब्याहने की आई तो मेरे पति मेरी बेटी से बोले बेटू " हमें तुम्हारा घर बसाना है, तुम्हें फलते-फूलते देखना है। " 

बच्ची तुम्हारी खुशी मे हमारी खुशी है।

मेरा दिल इतना खुश हुआ कि बता नही सकती, आज मेरे पति के सहयोग की वजह से मेरी बेटी dy manager hai bank 😊मे।

काश सभी के पिता अपनी बेटी को खाली जिम्मेदारी ना समझे, बल्कि अपने आप को इन प्यारी बेटियों का जन्मदाता औऱ सौभाग्यशाली समझे।

जिनको हैं बेटियां ,वो ये कहते हैं ,परियो के देश मे हम तो रहते है।

Love u betu,my daughter 😊my life👍👌

काश हम सभी के माँ बाप की सोच ऐसी होती, तो ये जो ससुराल वाले हमें अपनी जगीर समझने लगते हैं, औऱ बेगार करवाते हैं......औऱ शादी के इतने सालो बाद हम लोगों को अपना घर कौन सा है ????

ये नही सोचना पड़ता। बुड़ापे मे कोई माँ कभी आश्रय विहीन ना होती। 

काश हर लड़की कि किस्मत मे 😊loving ,careing पापा हो ,न कि एक बाप।

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