एहसास
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|   Apr 19, 2017
एहसास

ये वो शब्द है जो सभी को होता है। चाहे वो अच्छा हो या बुरा। बचपन मे ये लगता था जल्दी से बडे हो जाओ । कितनी आसान जिँदगी लगती थी। कि जब माँ बन जाऊगी तो ये पढाई -लिखाई नही करनी पडेगी।बस खाना बनाया खाया खिलाया औऱ ढेर सारी मस्ती। 

पर शादी के बाद एहसास हुआ माँ बनने औऱ माँ की छाया मे जिँदगी गुजराने मे बडा अन्तर है। माँ घर के आँगन का वो नीम का पेड़ है जो छाया भी देती है औऱ समय आने पर औषधि का भी काम करती है।

शादी के बाद जब माँ बनने का सौभाग्य मिला तो इस खुशी का एहसास ही नही हो पाया । जिसके बारे मे बचपन मे सोचती थी कि बड़ा मजा आएगा पर सासू माँ के तरकश से निकले बाड़ो ने खुशी का एहसास ही नही होने दिया। 
फिर बेटी का जन्म तो जैसे "करेला नीम चढ़ा जैसी स्थिति हो गई। काश सास की जगह माँ साथ होतीं तो ......

बेटी बड़ी हो गई पर ईश्वर ने फिर दोबारा उस खूबसूरत एहसास से फिर ना नवजा । 

बेटी पढ़ लिख कर अपने पैरों पे खड़ी हो गई है। 

कुछ समय बाद उसका ब्याह है। बहुत अच्छा लगता है ।

आज बहुत सारे अच्छे बुरे एहसास मेरे पास हैं।

पर मेरी सभी सास से विनती है कि दहेज के लालच मे किसी लाडली से ईश्वर के दिए सुखद मातृत्व के अनमोल एहसास को न छीनो please....😢

जिँदगी ना मिलेगी दोबारा😢

आज मेरी माँ इस दुनिया मे नही है। पर उनका प्यार और दुलार का एहसास आज भी उनको हम सभी के बीच होने का एहसास देता है। 

वो कहती थीं ......

बबूल नही घर के आँगन की तुलसी होती है बेटियां, दो घरों की शान होतीं हैं बेटियां, माँ बाप का अरमान औऱ ससुराल की शान होती हैं बेटियां।

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