जब बच्चों को आपकी जरूरत थी तो आप.........😢???????
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|   May 03, 2017
जब बच्चों को आपकी जरूरत थी तो आप.........😢???????

आप लोग fb पे आज कल ये comments अक्सर पढ़ते होगें अपने बच्चों के साथ ज्यादा समय व्यतीत कीजिए , बच्चों के पास सामान कम होगा तो कोई बात नहीं ,पर अगर संस्कार नहीं होगें तो जीवन नरक हो जाएगा।

अभी कुछ दिन पहले मैंने एक प्यारी सी बिटिया की बात सुनी जो अपनी माँ से कहती है "मम्मी तुम अपना कोई भी कीमती सामान काम वाली बाई को नहीं देती ...फिर मुझे क्यों पूरा दिन उसके पास छोड़ती हो?????😢आज मैं आप लोगों के साथ समय के सबसे ज्वलंत औऱ गम्भीर विषय पर बात करना चाहती हूँ। अक्सर लोग कहते हैं बच्चे बिगड़ गए हैं। हमारी एक नहीं सुनते। बड़े बुजुर्गों को शिकायत होती है ,जब से बहू आई है बेटा तो बदल गया है। बेटे के पास हम लोगों के लिए समय ही नहीं है। जब देखो दोनों अपनी ही दुनिया मे मगन रहते हैं। वे सास ससुर ये कैसे भूल जाते हैं कि बेटा बहू को जब उनकी जरूरत थी तो सासू जी कभी साथ क्यूँ नहीं देतीं थी औऱ बहू अगर कहती है कि माँ आप जरा मेरी कुछ मदद कर दीजिये । तो सासू जी का दिन रात का ताना ..अपनी माँ को बुलाओ या बीमारी मे बहू को उसके मायके भेज देना औऱ सबसे कहना इनकी बीमारी सब बहाना है मझसे नहीं होगी सेवा .. और यदि बहू को कहीं जाना हो तो सासू माँ बोलती हैं अपना बच्चा लेकर जाओ मुझसे नहीं सम्भलेगा। ससुर जी बोलते हैं अपना बवाल लेकर जाओ ।बहू का सौढ़ी जापा सासू जी को बोझ लगता है । पहले जापे मे अस्पताल मे बहू को अगर बेटी पैदा होती हैं तो सासू जी बोलती है "मेरे बेटे की कमाई मे काई नहीं लग रही थी जो तुम लड़की पैदा हुई हो।जबकि सासू जी खुद चार-2बेटियों की माँ हैं। बहू को दिन भर कोसा जाता है कि तुम करती ही क्या हो...पर अगर बहू मायके जाने का नाम ले ले तो पूरे घर मे आफत आ जाती है। सास नंद खुसफुस चालू कर देती हैं ।महरानी मायके जाएगी .....तो तुम्हारे आदमी को खाना कौन खिलाएगा। अगर माँ बाप अपनी इकलौती बेटी को बुलाने के लिए जोर देते हैं तो सासू का बहू के पिता को आदेश होत है इतनी ही बेटी को बुलाने की आफत आ रही है तो हमेशा के लिए ले जाइए। लाचार लड़की वाले अपना सा मुँह लेकर अपनी लड़की को बेगैर लिए वापस चले जाते हैं।अगर लड़की की माँ ज्यादा बीमार हो औऱ पिता बोले बेटी थोड़े दिन औऱ रूक जाओ तुम्हारी माँ के प्राण तुममे बसे हैं। उनका समय आ गया लगता है वो ज्यादा दिन नहीं चलेगी। तुम वापस जाओगी औऱ तुम्हें उल्टे पैर आना पड़ेगा। तब बहू सास ससुर से माँ का सब हाल और पिता की बात बता कर कुछ दिन और रहने की मोहलत. माँगती है तो ससुर जी.बोलते हैं मरती हुई माँ को और कितने दिन सेवोगी चलो अपने घर वापस आओ। वापस आने के तीसरे दिन बहू की माँ पंच तत्वों मे विलीन हो जाती है। बेटे को व्यापार मे दिक्कत आती है तो सास ससुर बोलते हैं हम क्या जाने तुम जानो औऱ जब वही बेटा भर -२ थैली लाता था तो बेटा अपना था। जब कभी बेटे बहू को माँ बाप की जरूरत थी तो वे वहाँ नहीं थे ।पर ताना देने मे लड़के के माँ बाप अपने बेटे को भी नहीं छोड़ते ......कि बेटा अब हमारा कहा रहा वो तो जोरू का गुलाम हो गया है।इन सब हरकतों के बाद सास ससुर चाहते हैं कि बहू उनकी सेवा करें ..........अब आप सब पाठक गण ही इस व्यथा को दूर करने का उपाय बताइए।ताकि समाज मे बड़े बूड़ो का सम्मान बना रहे और संयुक्त परिवार बने रहे ।किसी माँ बाप को वृद्ध आश्रम न ढ़ूढ़ना पड़े। so please it's my request to all in-laws अपने. रिश्तों की गरिमा बनाए रखे ।अपनी आगे की पीढ़ी को प्यार भरे संस्कार दें।पोता-पोती , दादा -दादी का सुख पाए ।

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