मुझे क्यों नहीं सिखाया 😢...माँ
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|   Aug 03, 2017
मुझे क्यों नहीं सिखाया 😢...माँ

मेघा माँ -पापा की लाड़ली बिटिया।आधुनिक विचारधारा के माता पिता की संतान होने के कारण भाइयों की बराबरी से पली बढ़ी।पढ़ने में अच्छी थी तो माँ भी उसे घर के कामों में कम उलझाती थी।खुद ही सब करती रहती उसे बस पढाई के लिए प्रोत्साहित करती रहती।घने काले बालों के कारण ही दादी ने मेघा नाम रखा था।नैन नक्श तीखे ,रंग गोरा कुल मिला कर खूबसूरत थी वो।अच्छी खासी शिक्षित होने पर बड़ी जल्दी उसका विवाह एक नौकरी पेशा लड़के से हो गया।

                 ससुराल में शादी के बाद पहली बार गई तो पूरे एक माह रही मेघा।उस दौरान मेहमान भी थे और रिवाज़ के अनुसार पहली बार बहु से कुछ भी काम नही करवाया गया।मेघा का शादी के बाद पहला माह कब फुर्र हो गया पता ही ना चला।एक माह बाद मेघा मायके पहली बार पहुँची ।बहुत खुश थी वह।दिन भर माँ को बस ससुराल की, घूमने फिरने की ,बातें बताती रहती।माँ भी गदगद मन से सब सुनती रहती।आखिर एक माँ के लिए इससे ज्यादा खुशी की बात क्या होगी कि उसकी बेटी ससुराल में खुश है।15 दिन मायके में बीतते ना बीतते मेघा के ससुराल से बुलावा आ गया।मेघा के ससुर और देवर उसे लेने आ रहे थे।मेघा उनके साथ फिर से ससुराल यानी अपने पिया के घर आ गई।

                   इस बार मेघा ससुराल आई तो सारा परिदृश्य ही बदला हुआ था।सारे मेहमान जा चुके थे।घर में मेघा के पति के अलावा सास, ससुर और देवर थे।पहले दिन से ही सासू जी मोर्चा संभाल कर तैयार थी।मेघा को किचन में बुलाया उन्होंने और खाने की तैयारी करने के साथ ही मेघा से सहायता लेने लगी।मेघा ये उठाओ ,वो लाओ,इसे यहाँ रखो ,उसे वहाँ ....इत्यादि।मेघा यंत्रवत सब करती जा रही थी।सासू जी मेघा को सब बताती जा रहीं थी कि कौन सी चीज कहाँ रखी है और क्या कैसे करना है।मेघा सर पे पल्लू धरे सब समझने की कोशिश करती रही।अब आगे से ये किचन तुम्हें ही संभालना है ...इस डायलॉग के साथ मेघा की उस दिन की ट्रेनिंग खत्म हुई।रात में सोने से पहले मेघा अपनी माँ की हिदायत अनुसार सास ससुर के पैर छूने गई तो सासू जी ने अगले दिन का निर्देश थमा दिया।मेघा कल से सुबह उठकर जल्दी नहा लेना हमारे यहाँ रसोई में नहा के ही प्रवेश करते है।हामी में सर हिला कर मेघा सोने चली गई।

                  अगले दिन से अपने कहे अनुसार सासू जी ने किचन मेघा के हवाले किया और क्या -क्या बनना है का निर्देश दे कर मंदिर का रुख कर लिया और बोली -हमने बहुत किया है भाई अब तो हम राम भजन और आराम करेंगे।मेघा किचन में  कुछ देर हक्की बक्की खड़ी रही।फिर पल्लू खोंस कर लग गई काम में। लेकिन मेघा को सूझ ही नहीं रहा था क्या करूँ कैसे करूँ,किससे पूछ लूँ ।हार कर माँ को फोन लगाया तो माँ ने भी सहानुभूति से कहा बेटा वहाँ का जो system हो उस हिसाब से करो अब मैं क्या बताऊँ यहाँ से।जैसे तैसे मेघा ने दो -ढाई घण्टे में खाना बनाया।सबको परोस कर खिलाया सबने चुपचाप खाना खाकर अपने अपने काम की ओर रुख किया।अंत में मेघा ने सास के साथ खाना खाया।सास भी कुछ नहीं बोली खाके सोने चली गई।लेकिन ये क्या मेघा को खुद का बनाया खाना ही बेस्वाद लग रहा था।मेघा को बहुत ग्लानि महसूस हुई।जैसे तैसे मेघा ने 2-4 दिन ससुराल में काटे और फिर भाई के जन्मदिन के बहाने मायके आ गई।

                     मायके आते ही मेघा माँ से लिपट कर खूब रोई।मेघा जब थोड़ी संयत हुई तो माँ ने पूछा क्या हुआ लाडो? मेघा ने कहा -माँ आपने मुझे सब सिखाया लेकिन ढंग से खाना बनाना और गृहस्थी के काम करना क्यों नहीं सिखाया।वहाँ मेरी सास ने जाते ही पूरा गृहस्थी का भार मुझ पर डाल दिया है, और वो मेरी कोई सहायता भी नही करती।इतना सुनकर माँ का चेहरा उतर गया।कुछ देर चुप रहने के बाद माँ ने मेघा को गले से लगाया और बोली-अरे तो इसमें रोने की कोई बात नहीं ,मेरी लाडो तो होशियार है।वो सब जल्दी सीख जाएगी। मेघा 1हफ्ते मायके में माँ की ट्रेनिंग में रही एक एक चीज़ समझी।और जो भूलने वाली बात लगी उसे एक डायरी में नोट करती गई।

                  एक हफ्ते बाद जो मेघा ससुराल पहुँची वो आत्मविश्वास से भरी हुई प्रसन्न चित्त और दृढ़ संकल्प से लबरेज़ मेघा थी।अब मेघा सर्वगुण सम्पन्न नारी जो बन गई थी। 

                   💐☺  आज का समय ऐसा है कि लड़का हो चाहे लड़की उसे पढाई, लिखाई और अन्य कामों के अलावा खाना बनाना भी आना आवश्यक होता है।☺💐

                   💐👍☺  इसलिए अपने बच्चों को खूब लाड़ प्यार दें खूब पढाएं लिखाएं उन्हें अपने पैरों पे खड़े होने की काबिलियत दें साथ ही उन्हें अगर आप cooking expert भी बनाती हैं तो वो हमेशा सुखी रहेंगे।☺👍💐

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