Lactose Intolerance : कहीं आपके बच्चे को भी तो नहीं 
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|   Feb 08, 2017
Lactose Intolerance : कहीं आपके बच्चे को भी तो नहीं 

आज भले ही मैं एक स्वस्थ, किशोर की माँ हूं, पर आज भी अपने बच्चे को पालने और बड़ा करने के दौरान हुए अनुभव मुझे याद हैं। सुख के साथ दुःख भी तो आता है। सुख जहां आपको एक सुखद अनुभूति देते हैं,वहीं दुःख आपको दर्द देते हैं। दोनों ही मिल कर हमें जीवन को जीने की कला सिखाते हैं। एक माँ के लिए अपने बच्चों को तकलीफ में देखना दुखदायक होता है, खासकर जब बच्चा ऐसी उम्र में हो जब उसे अपनी ही समझ न हो। न तो वो दुःख बता पाता है न ही सह पाता है। ऐसा ही कुछ मेरे बच्चे के साथ भी हुआ। जब तक वो माँ के दूध पर था, तब तक ठीक था। छः महीने पर मैने ‘Cerelac’ जैसे आहार भी शुरू किये। साथ ही फल सेब, केला, संतरा, अंगूर जैसे फल भी देती थी। तब तक सब ठीक था ।हाँ कभी कभी अंगूर और अनार से पेट खराब हो जाता। मैं सोचती की शायद दाँत आ रहे हों इसलिए ऐसा हो रहा है। अब जब मेरा बेटा सवा/डेढ़ साल का हुआ तो मैंने उसे सूजी खीर ,दलिया और ऊपर का दूध देना शुरू किया। अब अक्सर उसका पेट खराब रहने लगा। ख़ास कर दस्त लग जाते। हम डॉक्टर को दिखाते, दवाई देते , कुछ दिन सब ठीक रहता। अगर तकलीफ ज्यादा खीच जाती तो एंटीबायोटिक्स चलती। हम इससे कभी दाँत आने के दौरान होने वाली तकलीफ या लीवर का कमजोर होना ही समझते रहे। 

अब तक मेरा बेटा दो साल का हो चुका गया था। पर अभी भी वही तकलीफ़ उसे सता रही थी। अब तो रोटी सब्ज़ी फल दूध उसे पूरा आहार देने की कोशिश करती। वो पहले से ही कमजोर था और यह तकलीफ़ उसे और बढ़ने नहीं दे रही थी। शरीरिक तौर पर वह अंदर बाहर दोनों तरह से कमजोर हो रहा था। अब तक मैं कुछ बातों पर गौर कर चुकी थी जैसे कौन से फल उसे अपच करते हैं और दूध और दूध से बनी चीजों को लेने के बाद उसका पेट खराब हो रहा था। मैंने उसके डॉक्टर को सब बताया। उन्होंने उसका स्टूल टेस्ट करने को कहा। रिपोर्ट्स देख कर डॉक्टर ने जो हमे बताया वह हमारे लिए नया ही था। लैक्टोस असहिष्णुता(Lactoce Intolerance) .....!

लैक्टोज प्राकृतिक शुगर की तरह है, जो दूध के उत्पादों में पाया जाता है। यह पनीर, दही, आइसक्रीम आदि में पाया जाता है। लैक्टोज असहिष्णु‍ता की समस्या पेट में होती है। इसकी वजह से पेट में दर्द, सूजन, पेट के फूलने जैसी समस्‍या हो सकती है। इसके कारण उल्टी, दस्त, मिचली, खाना न पचने जैसी समस्याएं भी होती हैं। ज्यादातर यह समस्या छोटे बच्चों को होती है लेकिन बडे़ लोगों में पेट की बीमारी के उपचार के बाद यह समस्‍या होती है।

हमने डॉक्टर से इसका इलाज पूछा , तो उन्होंने बताया की यह समस्या ज्यादातर अस्थाई होती है। बढ़ती उम्र के साथ जैसे जैसे बच्चे की इम्युनिटी बढ़ती है ये तकलीफ़ भी कम ही जाती है। बस फिलहाल आप इसे या तो गाय का ढूध दें या सोया मिल्क। ये दिनों ही दूध पचने में आसान है, और आसानी से हजम भी हो जाते हैं। और कभी भी अपने बच्चे को खेलने से तुरंत पहले दूध न पिलाये वरना दूध उसे देर से पचता है और इस दौरान अगर वो भागेगा दौड़ेगा तो उसकी तबियत खराब हो सकती है। जिन फलों से पेट खराब होता है वो भी न दें। टाइम टाइम पर छः छः महीनों के अंतराल पर दूध देते रहे ताकि यह पता चलता रहे की दूध के प्रति शरीर की स्वीकृति हुई की नहीं। हमे डॉक्टर बताये अनुसार किया । उन दिनों सोया मिल्क आसानी से उपलब्ध नहीं होता था तो हम घर पर स्टॉक रख लेते थे। दवाइयां चलती रहीं। 

हालाँकि एंटीबयोटिक देने की वजह से उसका लिवर भी कमजोर हो गया था। मैं उसकी बढ़ती उम्र के साथ साथ उसे दूध या उससे बनी चीजें देती रही । फलों के प्रति उसकी संवेदनशीलता अब कुछ कम हो गयी थी। पर दूध अभी भी…..। अब वो पांच साल का हो गया था। डॉक्टर ने हमे समझाया कि बढ़ती उम्र के साथ साथ जैसे जैसे बच्चों की इम्युनिटी बढ़ती है ये समस्या भी कम होती जाती है। हम खुद को तसल्ली देते और अच्छे की उम्मीद करते। करीब सात साल की उम्र के आसपास, मैंने देखा की अब उसका शरीर पहले की तरह दूध को नकार नहीं रहा है।धीरे धीरे मैंने दूध की खुराक बढ़ाई। पहले हफ्ते में दो दिन। फिर दो दिन दो दफा…..धीरे धीरे सात दिन दो वक़्त।

अब उसका शरीर पूरी तरह दूध को स्वीकार रहा था। हमने तसल्ली की सांस ली। अब मेरा बेटा अपनी उम्र के हिसाब से बढ़ रहा है। भगवान उसे अच्छी सेहत और लंबी उम्र दे। पर आज भी जब मैं उसके बचपन को याद करती हूँ तो यह कड़वी यादें भी याद आती हैं। उसका दर्द तकलीफ़ याद आता है।  कई बार हम बच्चों में हो रही पेट दर्द, दस्त, उल्टी जैसी तकलीफों को दाँत आना जैसी बातों से जोड़ देते हैं या फिर दवाइयां चला देते हैं। पर भूल जाते हैं कि इनका लंबे समय तक लेना अपना असर भी छोड़ेगा। दवाइयां यदि एंटीबायोटिक हों तो साइड इफ़ेक्ट होता है जिसका बच्चे पर कहीं न कहीं असर होगा। तकलीफ की जड़ को समझना जरूरी है। 

आशा करती हूँ की मेरा यह अनुभव आपके साथ बांटना आपके काम आएगा। 

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