डिलीवरी के बाद डिप्रेशन में मां
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|   Jun 24, 2017
डिलीवरी के बाद डिप्रेशन में मां

मां बनना जितना खुशी देता है, उतना ही मुश्किल भी। एक नन्हें सी जान को इस दुनिया में लाकर दुनिया को समझने और जीने के काबिल बनाना  सबसे बड़ी चुनौती है। ये कह कर, कि 'अरे बच्चे तो पल जाते हैं...' बचा नहीं जा सकता, क्योंकि बच्चे पलते नहीं उन्हें पालना पड़ता है अपनी नीद त्याग कर,अपना आराम छोड कर,और उसके लिए सबसे बड़ी भूमिका निभानी पड़ती है माँ को। 

लेकिन ऐसा हर बार नहीं होता कि एक नई बनी मां भी अपनी इस जिम्मेदारी को निभाने के लिए शारीरिक और मानसिक दोनों रूपों में तैयार हो। जहां कोई जगह खाली रह जाती हैं, वहीं शुरू होता सामान्य और डिप्रेशन का द्वंद।

अमेरिका  में हुए  अध्ययन के अनुसार दस में से एक नई माँ को प्रसव पश्चात अवसाद होता है और यह बहुत सी माँओं को होने का खतरा होता है।

जल्दी समाप्त होने वाला डिप्रेशन बहुत गंभीर नहीं होता है। ये अवसाद लगभग 80% महिलाओं को होता है। ये प्रसव के बाद शुरू होता है और आमतौर पर बिना किसी प्रकार के चिकित्सकीय उपचार के कुछ हफ़्तों में ही ठीक हो जाता है। देर तक रहने वाले अवसाद को ही ज्यादातर डॉक्टर पोस्टरपार्टम डिप्रेशन मानते हैं। ये अधिक गंभीर होता है और प्रसव के बाद कई हफ्तों से लेकर एक वर्ष तक रह सकता है। ये अवसाद 10% -16% महिलाओं को होता है।

प्रसव के बाद की देखभाल में पर्याप्त रूप से नींद ले

डिलीवरी के बाद भी मां का शरीर सुधार की अवस्था में रहता है और केवल बच्चे को ही नहीं बल्कि मां को भी पर्याप्त रूप से नींद की आवश्यकता होती है। सही से सोने से और आराम से, मां का स्वास्थय सुधरता है और साथ ही इस से डिप्रेशन के लक्षण जैसे चिड़चिडाहट, मूड स्विंग्स, दुःख और अन्य का इलाज हो सकता है।

पोस्टपार्टम डिप्रेशन का इलाज के लिए व्यायाम करें

सभी प्रकार का व्यायाम मां के लिए सही नहीं हैं, जिसने कुछ दिनों पहले ही बच्चे को जन्म दिया हो लेकिन कुछ व्यायाम जैसे फ्रीहैण्ड एक्सरसाईस और बिना अपने आप को थकावट महसूस कराए धीरे से दौड़ना या चलना का उपयोग कर सकते हैं। 

योगा की मदद से इस डिप्रेशन से निजात

मेडिटेशन, प्राणायाम और ब्रीदिंग एक्सरसाइज से डिप्रेशन को कम करने में काफी मदद कर सकते हैं। इनमें उज्जयी ब्रीथ, फुल योगिक ब्रीथ, भ्रामरी प्राणायाम, योग निद्रा, नाड़ी शोधन प्राणायाम शामिल हैं। ये तेजी से और बेहतर ढंग से बॉडी को रिकवर करने में सहायता करता है।

अपने आहार पर ध्यान दें

आप क्या खाते है, आप वैसा ही महसूस करते है। इसलिए इस दौरान अपने आहार पर ध्यान दे। ज्यादा हरी सब्जियां, ताज़े फल और अनाज को अपने आहार में मिलाये और अपने मूड को बेहतर बनायें। इन खानों में विटामिन्स और मिनरल भरे पड़े है जिससे ब्रेन में मौजूद सेरोटोनिन को बढ़ाया जा सकता है। ओमेगा 3 फैटी एसिड भी मूड को बेहतर बनाने के लिए माना जाता है इसलिए अच्छा होगा कि आप अपने आहार में फैटी फिश, नट्स और बीज का उपयोग करें और अपने आप को डिप्रेशन के दौर से बहार निकालें। इस दौरान शराब और कैफीन को अपने आप से दूर रखें क्योंकि इन से आपका मूड खराब हो सकता है और आप डिप्रेशन की ओर जा सकते है और ये भी ध्यान रखें की आपके रोजाना के आहार में नियमित रूप से प्रोटीन हो, क्योंकि कम प्रोटीन डिप्रेशन को बढ़ा सकता है।

अपने रिश्तों को समय दें

घर में नया सदस्य आने से आपके जीवन की नई राह शुरू होती है और इस दौरान आवश्यक है कि आप अपने पार्टनर के साथ रिश्ते को महत्व दे न कि उन्हें टालें। अपने साथ ऐसे व्यक्ति का होना जिसके साथ आप जिमेदारियों को बांट सकें और जो आपकी समस्या को समझ सके, इससे आप डिप्रेशन के दौर से आसानी से निकल सकती हैं। इसलिए बेहतर होगा की अपने पार्टनर, परिवार और दोस्तों को समय दें जिससे आप डिलीवरी के बाद उत्पन्न हुए डिप्रेशन का इलाज कर सकें।

अगर आप प्रसव पश्चात अवसाद से ग्रस्त माँ के साथी हैं ,तो उसको त्याग देना नही चाहिए बल्कि उसको प्यार और देखभाल की जरूरत है। आपको यह समझने की आवश्यकता है , कि यह एक ऐसी माँ है जो गंभीर भावनात्मक मनोविचारों की गिरफ्त में है। उससे थेरेपी और दवाओं के लिए आग्रह करें। आप स्वयं के लिए भी यह सुनिश्चित करें कि आपके ऊपर देखभाल और काम का अधिक बोझ ना हो ,और आपको कोई सहयोग करे। और जल्दी से जल्दी एक प्रोफेशनल मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञ से सम्पर्क करें।

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