गार्डनिंग सिखाएं और प्रकृति से परिचय कराएँ...#World Environment Day
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|   Jun 05, 2017
गार्डनिंग सिखाएं और प्रकृति से परिचय कराएँ...#World Environment Day

'सूरज की गर्मी से तपते हुए तन को मिल जाए तरुवर की छाया' सोचकर ही कितना आनंद और सुकून सा मिलता है। लेकिन यह कब संभव है जब जगह-जगह हरे-भरे वृक्ष लगे होंगे और वृक्ष लगाने वाला कोई तो होना चाहिए।  

मेरी बेटी के स्कूल में हर साल बच्चों को कम से कम एक club join करना होता है। abacus, dance ,drama, craft,swimming  और गार्डनिंग जैसे अन्य club में से बच्चे कोई भी क्लब का चयन कर सकते है। मेरा मन craft का था पर बेटी का मन गार्डनिंग का, इसलिए उसने गार्डनिंग  क्लब ही चुना।क्लब के कारण उसनें पेड पौधौ का महत्व समझा।  पर्यावरण का महत्व समझा| 

आज वो हर सुबह बालकनी जाती है और बारी बारी से लगाए हुए पौधो को देखती है पानी डालती है। कोन सा नया फूल आया है किस पौधे की पत्तियों मे क्या परिवर्तन होता है वो महसूस करती है। और ये देख कर फैसले पर गर्व होता है

स्वच्छ हवा, स्वच्छ भोजन, बिजली, और व्यक्तिगत स्वच्छता ये बुनियादी मानव अधिकार है। बढते भौतिक वाद ने सब कुछ प्रदूषित कर दिया है।

पर्यावरण का मतलब उगाने और उखाडने के बीच विवेक को बचाए रखना है

पर्यावरण  की जिम्मेदारी वास्तव में हमें ही लेनी होगी। यह जिम्मेदारी सामुदायिक जिम्मेदारी है।

साल-दर-साल बारिश का कम होना, भूजल स्तर कम होना और इसके विपरीत गर्मी की तपन बढ़ते जाना आदि चीजें सीधे-सीधे इसी पर्यावरण से जुड़ी समस्या है।

आज से सैकड़ों वर्ष पहले जब आज की तरह, हाइटेक इंजिनियर नहीं थे तब भी बेहतर जल प्रबंधन होता था। जबकि आज के समय जितनी समस्या नहीं है, उससे ज्यादा समाधान कर्ता उपलब्ध है,फिर भी समस्या विकराल होती जा रही है या यूँ कहें कि बनायी जा रही है। तीसरा विश्व युद्ध पानी के लिए होगा जैसी भविष्यवाणियां वे कर रहे हैं जो प्रकृति पदत्त , गैस, कोयला, खनिज ,पेट्रोलियम, पानी ,जमीन, ,जैव विविधता, जंगल, आदि का भरपूर और बुरी तरह दोहन कर रहे हैं।

शुद्ध पानी का अभाव है। और यह समस्या आगे चलकर और विकराल रूप लेगी, क्योंकि जल की शुद्धता से ज्यादा जरूरी है, मन की शुद्धता और सोच। जो आज बिल्कुल भी नहीं है।

अगली बार दिन में दो बार शॉवर, तीन बार फ्लश और चार बार फेसवाश लेने से पहले ,कार धोने वाले ,सड़क पर पानी बहाने वाले , पाइप बगीचे में डाल भूल जाने वाले,ब्रश करते वक्त नल खुला छोड़ देने वाले याद रखे की कोई पानी की एक बूंद के लिए तरस रहा है।

 ग्लास में आधा पानी पीने के बाद आधा फेकते समय जरुर सोचना चाहिए की इस आधे ग्लास पानी के लिए आपके ही देश के एक हिस्से में लोग जान दे और जान ले रहे है | " लोग एक मटकी पानी के लिए 10 किलोमीटर की दूरी तय कर घन्टो की लाइन लगा रहे है । स्थिति की भयानकता को समझिये और सम्हलिये | "The Hindu" के दिए गए आकड़ो से स्पष्ट है के 2015 में सिर्फ महाराष्ट्र में 3228 किसानो ने आत्महत्या कर ली | 2014 से 2017 के अप्रैल तक आत्महत्या किये किसानों का सरकारी आकंड़ा 30, 000 पार कर चुका है । 2001 से यदि अकेले महाराष्ट्र का आकलन करे तो सूखे की वजह से विदर्भ में आत्महत्या करने वाले किसानो की संख्या 20 हज़ार को पार कर जाती है । ये सूखा ,अकाल अंतिम सेफ्टी सायरन है | बूंद बूंद अनमोल है ये, तुम व्यर्थ न करना अमृत को, धरती स्वर्ग बनानी है, तो बचा के रखना पानी है॥

धरती और हरियाली का महत्व समझना पडेगा। धरती मानो हरी स्याही से लिख देती है कि तुम मुझे जितना दोगे मै तुम्हें उसका दुगना कर के वापस करूगी।

फैलते प्रदूषण,इसके दृष्टिगोचर होते परिणामों के बाद तो हमें चेत ही जाना चाहिए... तो क्यों न सर्वप्रथम इसकी रक्षा की जाए और समय रहते ग्लोबल वार���मिंग के दुष्प्रभावों से बचा जाए। कहा भी जाता है कि एक पेड़ लगाने से एक यज्ञ के बराबर पुण्य फल प्राप्त होता है। कम से कम एक पेड़ जरूर लगाएँ... 

#WorldEnvironmentDay

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