विचित्र माँ Part II......#Momspiration
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|   May 14, 2017
विचित्र माँ Part II......#Momspiration

ये उन माताओ कि आपबीती  जिन्होंने अपने बच्चों के लिए सब कुछ किया।  #Momspiration विचित्र माँ Part I

 #Momspiration विचित्र माँ Part II मे मै उन माताओं के बारे में बाताऊगी जिन्होंने अपनी संतान खोने के बाद भी माँ का हौसला नही खोया।पूरे समाज के लिए एक नई मिसाल बनी।

मैक्सिको की कारोबारी महिला और मानवाधिकार कार्यकर्ता मिरियम रोडि्ग्ज माटिर्नेज । एक ऐसी नारी जिसनें खुद से प्रयास कर के कठिन संघर्ष के बाद अपनी बेटी की छुपी हुई क्रब को ढूंढ निकालने में कामयाब हुई।मैक्सिको में ड्रग्स माफिया का दबदबा है कितने बच्चों का जीवन खराब हो गया। और न जाने कितने students गायब हो गए। मिरियम जी ने ऐसे 600 पीडित परिवारों की मदद की जिनके अपने कभी वापस नही....।पर इस बहादुर महिला की हत्या 14 may mothers day के दिन कर दी गई।

श्रीमती स्वराज यादव 1972 में गेजुएशन के पश्चात विवाह, लेकिन पढने की असीम ललक और धैर्य के परिणाम स्वरूप परिवार की जिम्मेदारियों के समांतार आपने पोस्ट गे्जुएशन ,BEd किया और फिर लैक्चरर की सेवाएं प्रदान की।पर माँ सबसे ज्यादा सफल अपनी संतान की सफलता से होती है आपके लिए वो ओर भी ज्यादा थी।क्योंकि आपके बेटे का selection आम्ड् फोर्स मेडिकल कालेज में हुआ और उसके साथ ही आपने एमफिल किया। पंरतु कालचक्र की कृदुष्टि की वजह से होनहार युवा पुत्र ने अपनी आँखें सदा के लिए बंद कर ली। इस दुख की कल्पना करना भी असंभव है पर आपने पवर्त जैसे विशाल दुख को पवतारोहण से ही सहने लायक बनाने की कोशिश की।पिछले 4 सालो में अपाने 50 बार अलग अलग स्थानों पर पवतारोहण किया।साथ छोडे गए व्यक्ति की खानापूर्ति कोई नही कर सकता पर अपने दर्द को दवा बनाना साहस से भरी माँ के लिए ही संभव है।

और अंत मे उस माँ की बात करना चाहती हूं जिसनें मुझे बनाया मेरी माँ।3 साल के बाल्यकाल में ही अपने पिता को खो दिया, बचपन से लेकर युवावस्था तक अपने एकमात्र भाई का हाथ थामे मेरी नानी के साथ जीवन के सुख दुख बाँटे,जीवन का संघर्ष का झेला। फिर शादी हुई, जिस 27साल मे मेरी शादी हुई तक तक तो मम्मी के जीवन हम दो भाई ओर एक बहन आ चुके थे।मध्यम वर्ग का संघर्ष, तीन बच्चों का पालन आसान नही था।ज्यादा पढी लिखी नही थी, पर अपने बच्चों को अच्छी शिक्षा दी, अच्छे संस्कार दिए,स्वाभिमान सिखाया, एक इंसान को इंसान समझने की तमीज सिखाई।लेकिन जब जीवन का संपूर्ण संघर्ष सुखमय फल के रुप में फलीभूत होता उस समय ईश्वर को कुछ और ही मंजूर था।सिर्फ 2दिन और जीवन के 3 आधार स्तंभ उन्होंने खो दिए।हर मुश्किल की ढाल एकमात्र भाई,प्यार और सम्मान देने वाला पति,मातृत्व की पहली अनूभूति पहली संतान 27साल का बेटा।किसी भी नारी के लिए असहनीय दुख....पर जाने वाले के साथ जो जी रहे है उनका जीवन समाप्त नहीं हो जाता,संमदर जैसे विशाल दुख को हर पल सहते हुए जीना पडता है।बच्चों की माँ बन कर.... बच्चों के बच्चों की माँ बन कर.......

Salute to all mom's 

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