सुख दुख के साथी
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|   Jul 24, 2017
सुख दुख के साथी

शादी जिसमें किसी एक क्षण तो ऐसा लगता है की एक दूसरे को पूरी तरह से जानते है पर दूसरे ही पल अनजाने से लगने लगते है। वैसे भी एक इंसान को समझने के लिए पूरी जिदंगी कम पड जाती हैं इसलिये मान्यताओं के मुताबिक जीवनसाथी को समझने के लिए ऊपरवाले ने सात जन्म दिए है।जिस पल महाभारत का माहौल होता है उस पल ये लगता हैं कि काश ये जन्म सातवां हो।ओर जब प्रेम की बयार बहती है तब प्रार्थना होती है की ये जन्म पहला हो| 

पर एक सफल वैवाहिक जीवन इतना आसान नही है क्योंकि theory और practical में बहुत अंतर होता है। आपको कुछ समझोते करने होते है कुछ बातो को नंजरअदाज करना पडता है यदि इसके बाद एक सफल प्यार भरा वैवाहिक जीवन फल के रुप में मिले तो कोई घाटे का सौदा नही है। बस एक दुसरे का आत्मसम्मान आहत न करे । एक दूसरे के परिवार को अपना परिवार माने तो अपने आप राह आसान हो जायेगी।  हर पत्नी मे कुछ common बाते होती हैं जैसे New dress के लिए "मैं मोटी तो नही लग रही, color सूट कर रहा है या नहीं" Complain भी एक जैसी "आप मेरी तारीफ नही करते" ओर तर्क भी एक जैसे "कि आपकी शादी तो जिस भी सबसे बुरे व्यक्ति कि नाम जेहन मे आ जाए उससे होनी चाहिए थी।" 

शहद से भी ज्यादा मीठी और नीम से भी ज्यादा कडवी यादे हर वैवाहिक जीवन मे होती है पर किसी भी विवाद की उम्र एक रात से ज्यादा नही होनी चाहिए।और ये theory हर संबंध पे लागू होती है। 

किसी ने लिखा है 

अपनी गृहस्थी को कुछ इस तरह बचा लिया मैंने 

कभी आँखें दिखा दी तो कभी सर झुका लिए मैने।

 मियां हो या बीबी महत्व मे कोई भी कम नही  

कभी खुद डान बन गए तो कभी उन्हें बास बना दिया मैने। 

जब हम दोनो की आँखों मे मोटे मोटे चशमे होगे,शयाद मेरे पूरे दाँत जा चुके होगे हाथो में लकड़ी होगी ,घुटने जब दुखने लगेंगे,  कमर भी झुकना बंद करेगी तब एक दूसरे के पांव के नाखून काटने के लिए, केवल तुम और मै होगें। जब इस स्वार्थ के संसार मे किसी को हमारी जरुरत नही होगी उस उम्र की शाम में केवल हम दोनो होगें सुख दुख के साथी।

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