अपने हिस्से की धूप
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|   May 06, 2017
अपने हिस्से की धूप

सुबह सुबह फ़ोन की घंटी बजी, मैं किचन में व्यस्त थी।फोन उठाया तो पता चला कि आज शांति नहीं आएगी।शांति मेरी maid है। मेरे मन में यही आया कि अब घर के काम कैसे होंगे।इंसान भी कितना संवेदनहीन होता है, दूसरों की समस्या से कोई मतलब नहीं होता।मुझे पहले उसका कष्ट पूछना चाहिए था।खैर मुझे अपनी गलती महसूस हुई, और मैंने उसका हाल-चाल लिया। उसने बताया कि वह कल आयेगी।

            दूसरे दिन वह कुछ परेशान नज़र आई।पूछने पर पता चला कि पति सारा पैसा शराब में उड़ा देता है, बच्चों पर भी ध्यान नहीं देता।भगवान भी कुछ लोगों कि ज्यादा परीक्षा लेता है।

            शांति बहुत ईमानदार और मेहनती थी, अपना काम पूरी तत्परता से करती थी। मुझे याद है जब पहली बार मेरे यहाँ काम के लिए आई थी तब ठंड का मौसम था।उसको मैंने चाय दिया तो उसने बहुत धन्यवाद दिया साथ ही आशिर्वाद भी। जो उसने मुझे बताया उससे समाज में व्याप्त संवेदनहीनता की झलक मिलती है । उसने बताया कि लोग इतनी ठंड में उसे चाय भी नही देते हैं। शायद इसीलिए वह मेरे प्रति इतनी कृतज्ञ थी।

            उसको एक महीने में तीन छुट्टियां ही लेने का अधिकार था, ज्यादा लेने पर लोग उसका पैसा काट लेते थे।इतनी मेहनत और लगन से काम करने के पश्चात भी लोगों को उसपे दया नहीं आती थी।

            शांति खुद अनपढ़ थी परंतु पढ़ाई का महत्त्व जानती थी।अपने बच्चों को स्कूल भेजती थी, tution भी भेजती थी। इस काम में उसको अपने पति से कोई सहयोग नही मिलता था। एक दिन मैं अपने बच्चे को पढ़ा रही थी तो उसने जो बोला उससे उसकी सोच पता चलती है उसने कहा "दीदी आप इतना पढ़े हो इसलिए अपने बच्चे को पढ़ा पा रहे हो, मुझे तो अपने बच्चे के लिये ना समय है और ना ही समझ। काश मैं भी पढ़ी होती ।   मैन बोला "तू मुझसे पढ़ लिया कर" ।

            कई बार लोग अपने घरेलू सहायक के प्रति अच्छा व्यवहार नहीं करते। घर में कोई पालतू जानवर होता है तो लोग उनका कितना खयाल रखते हैं, अच्छी बात है रखना भी चाहिए। परन्तु, जो हम सबकी मदद के लिए है उसका ध्यान रखना भी तो हमारा कर्तव्य है । इंसान इतना संवेदन शून्य कैसे हो गया है ? इंसान होने के कारण हमारा फर्ज है कि हम दूसरे इंसान को सम्मान दे, उनकी इज्जत करे, उनके कष्ट को समझें, उनकी मदद करे।

            मैंने देखा है कि कुछ लोग बेवजह अपने घर काम करनेवाले लोगों पर चिल्लाते हैं, जगह जगह उनकी बुराइयां करते हैं। एक घटना मैं आपको बताती हूँ। शांति एक घर में बहुत सालों से ईमानदारी से काम करती आ रही है । परंतु एक दिन उनकी सोने की अंगूठी नही मिल रही थी तो उनलोगों ने बिना सोचें समझे उसपर दोष लगा दिया। बाद में उनकी अंगूठी मिल भी गई, उनके छोटे बच्चे ने कही खेल कर रख दी थी। शांति को इतना बुरा लगा कि उसने वहां काम छोड़ दिया।

आत्म सम्मान सबका होता है, इज्जत सबकी बराबर होती है। गरीब अमीर सब बराबर होते हैं। सबको बराबरी से जीने का हक़ होता है। प्रकृति सबको बराबर समझती है । नदियाँ सबको जल देती हैं, पेड़ सबको फल देते हैं। अतः सबको सम्मान दो सबको प्यार दो, फिर देखो ये दुनिया कितनी सुंदर हो जाएगी। छोटा छोटा प्रयास ही मत्वपूर्ण होता है, परिवर्तन लाता है। कभी कुछ अच्छा बना हो तो उनको भी खिला देना, छोटी सी मदद कर देना, उनको प्रतीत कराना की आपको उनकी भी चिंता है। बस यही सब काफी ह��� उनके चेहरे पे मुस्कान लाने के लिए।

वह आत्मनिर्भर है, किसी के आगे हाथ नहीं फैलाती, मेहनत करके अपना घर चलाती है। इनके दुख को अगर गिनने बैठो तो ख़तम ही नहीं होते। एक बार को आप तारों को गिनने में सफल हो जाओगे परंतु इनके दुख नहीं। अभी दो चार दिन पहले ही तो शांति अपनी बड़ी बेटी की व्यथा सुना रही थी कि उसका पति उसको सम्मान नहीं देता बल्कि मारता है। मैंने उसे समझाया कि घरेलू हिंसा जुर्म है। किसी को हक़ नहीं है मारने का। मैंने उसे बोला कि "अपनी छोटी बेटी की शादी जल्दी मत करना उसे पढ़ाना, आत्मनिर्भर बनाना तत्पश्चात शादी का सोचना" ।

शांति एकटक मुझे देखती रही, शायद सब समझ रही थी। उसने नियति के सामने हार नहीं मानी है - उसने केवल इतना ही कहा कोशिश करुँगी बेटियों को आत्मनिर्भर बनाने की, और अपने काम मे लग गई।

शायद आप मेरे विचारों  से सहमत होंगे कि अपने हिस्से की धूप सबको सहनी पड़ती है, अपने हिस्से का दुख सबको झेलना पड़ता है, पर आप सहानुभूति रखकर, उचित व्यवहार कर के उस धूप की तपिश को कम जरूर कर सकते हैं। छोटा सा प्रयास ही किसी के जीवन में मुस्कान ला सकता है, बस थोड़ा सा हाथ बढ़ाने की आवश्यकता है। मेरा विश्वाश है कि समाज में परिवर्तन अवश्य आएगा।

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