सास बहू - एक प्यारा रिश्ता
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|   Apr 22, 2017
सास बहू - एक प्यारा रिश्ता

दिया को आज भी वो दिन याद है जब उसकी कुंडली मिलायी गई थी, पूरे 36 गुण मिले थे। उसके परिवार में उस दिन सभी बहुत खुश थे। परन्तु कहते हैं ना छत्तिस का आंकड़ा सही नही होता वैसा ही हुआ। गंभीर होने की आवश्यकता नहीं है। ऐसा तो हर पति पत्नी के बीच होता है। शादी के बाद उसने महसूस किया कि देव(पति)तो उससे बहुत भिन्न हैं । थोड़े दिन तो वह ससुराल में रही तत्पश्चात अपने पति के साथ दिल्ली चली आई। देव बहुत सुलझे हुए और शांत स्वभाव के थे और दिया एकदम बच्चों की तरह चंचल। उसका जीने का तरीका अलग था। इसके विपरीत देव काफी आदर्शवादीऔर हमेशा अपनी किताबो में खोये रहने वाले थे। हनीमून पर भी देव ने दिया से बड़े प्यार से पूछा था कि आप कौन सा Newspaper पढ़ती हैं, और दिया बहुत देर तक हँसती रह गई थी। आज भी वह देव का मजाक लेती है ।

इतना विपरीत स्वभाव था दोनो का किंतु प्यार में कोई कमी नहीं थी । कुछ महीने बाद देव की माँ आयीं साथ में रहने के लिए। पर वो थोड़ा गंभीर और पुराने खयाल की थीं। उन्हें दिया का अपनी दोस्तों से बात करना, बाहर समय बिताना अच्छा नहीं लगता था। यहाँ तक कि दिया का कार चलाना भी उन्हें पसंद नहीं था। दिया को कपड़े भी उनसे पूछ कर पहनने पड़ते थे। कभी कभी वे उसको एवं उसके परिवार को कुछ ज्यादा ही बोल देती थीं।

दिया का जीवन जो एकदम शांत नदी की तरह था, अब उसमें तरंगे उठने लगी थी। दिया को लगने लगा था कि कहीं उन तरंगों में उसका घर संसार ही ना उजड़ जाए। उस तूफान से ख़ुद को बचाने के लिए उसने शांत रहना ही मुनासिब समझा।

एक दिन माँ कि तबियत बहुत ख़राब हो गई थी। उस दिन घर पर केवल दिया और माँ ही थे - देव एक हफ्ते के लिए ऑफिस के काम से हैदराबाद गए हुए थे । दिया ने जल्दी से कार निकाली और अस्पताल पहुँच गई। डॉक्टर से सलाह के पश्चात माँ का इलाज शुरू हुआ। माँ का blood sugar और blood pressure काफी बढ़ा हुआ था ।

 

दिया ने उस समय माँ को डांट लगाई थी उसने कहा- “माँ कितनी बार बोला था मीठा मत खाओ पर आप किसी की नहीं सुनती हो, अब घर में मीठा रखूंगी ही नही। “

 

माँ कुछ बोल नहीं पाई थी, न जाने क्या सोच रही थी। डॉक्टर ने बताया कि कुछ दिन इनको यहीं रखना पड़ेगा। माँ कभी अस्पताल रही नहीं थीं । उन्होंने साफ़ माना कर दिया था। दिया ने माँ का हाथ पकड़ के उनको समझाया कि- “ये अस्पताल कितना साफ और सुरक्षित है।आप मुझ पर भरोसा करें मैं आपको कुछ नहीं होने दूँगी।“

 

माँ ने दिया कि आँखों में देखा और ना जाने कैसे मान गई । अगले 3-4 दिन माँ अस्पताल  में रही । दिन के काफी समय दिया उनके साथ रहती थी। इस समय दिया घर की भी देखभाल करती और माँ के लिए खाना भी लाती थी । माँ को तो अब दिया के बिना बिल्कुल अच्छा नहीं लगता था। जीवन में जब कठिनाई आती है तभी अपनो की सच्ची परख हो पाती है।अब माँ कभी कभी गहरे चिंतन में दिखती थीं। दूर अस्पताल की खिड़की के बाहर न जाने क्या तलाशती थीं। शायद आत्म मंथन कर रही थी। जब आप अपना अंतिम समय पास देखते हो तो ये स्वाभाविक होता है। एक लम्बे जीवन विस्तार में आपने क्या खोया क्या पाया, इसको समझने का प्रयास कर रही थीं कि दिया ने उन्हें पुकारा “माँ आज good news है, आज आप discharge हो रहीं हैं। लौटते समय मंदिर होते हुए जायेगे।“

माँ ने केवल सर हिला दिया था। घर पहुँचते ही दिया ने माँ का स्वागत किया था। उसने घर को फूलों से सजाया था। माँ के पसंद का खाना बनाया था। यह सब देख कर माँ की आंखों से अविरल आँसू बहने लगे। उन्होंने दिया को गले लगा कर कहा कि मेरी कोई बेटी नहीं है पर आज भगवान ने वह कमी भी पूरी कर दी। आज दिया ने माँ के दिल में जगह बना ली थी।

 

सास और बहू का रिश्ता बहुत नाजुक, पवृत्र और प्यारा होता है।इसको अच्छे से संभाल कर हैंडल करना चाहिए।

 

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