गर्भनाल की देखभाल
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|   Jul 18, 2017
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गर्भनाल की देखभाल

पहली बार जब मैं माँ बनी तो जैसी मैंने कल्पनाएँ की थी, कुछ नहीं हुआ। गोलमटोल ख़ूबसूरत नहीं, एक नन्हा सा झुर्रियों भरा, बालों भरा बच्चा था, ख़ूबसूरत तो बिलकुल भी नहीं। मेरा दर्द से बुरा हाल था और लोग हँस-हँस के उसकी शक्ल पापा जैसी बता रहे थे। महीनों तक बोझा मैंने ढोया, सारी पीड़ा मैंने झेली और शक्ल पापा जैसी?

अगले कुछ दिन अपने ही झंझटों में निकले, इस नन्ही जान को दिन रात का फ़र्क़ ना था। बच्चा कितना छोटा और कितना नाज़ुक हो सकता है मुझे अनुमान ही नहीं था। हर बार नर्से उसे मुझे पकड़ाती तो मुझे डर लगता की कहीं वो हाथ से फिसल ना जाए। उसकी नाभि पर एक नली थी जिस पर एक क्लिप लगा था। नहलाने, कपड़े बदलने, गोद में लेने और दूध पिलाने के समय उसे हाथ नहीं लगना चाहिए, यह मुझे बार बार बताया जाता। मैं डर गयी और बच्चे को लेने से कतराने लगी।

एक दिन मुझे डरी हुई देखकर डॉक्टर ने डाँटने बजाए प्यार से समझाया-

यह गर्भनाल माँ और बच्चे के बीच का पुल है। यह गर्भावस्था के समय बच्चा को पोषण पहुँचाने और उसका मल हटाने का कार्य करती है। जन्म के बाद इसकी आवश्यकता ख़त्म हो जाती है। इसी वजह से शिशु के जन्म के बाद इस पर दो क्लिप लगा कर इसे नाभि के पास काट दिया जाता है। दो क्लिप लगाने से ख़ून कम से कम बहता है। काटने में बच्चे को तकलीफ़ नहीं होती क्योंकि बालों और नाखूनों की तरह इसने भी कोई नाड़ी तंत्रिका नहीं होती।

जब तक गर्भनाल सूख कर झड़ नहीं जाती यह क्लिप लगा रहता है। यह सूखने में तीन-चार दिन लेती है, पर कभी कभी सूखने में बीस दिन तक भी लग सकते हैं।गर्भनाल के झड़ने तक इसकी देखभाल बहुत ज़रूरी है क्योंकि इसने कीटाणुओं के पनपने की अत्यधिक सम्भावना रहती है।

गर्भनाल की सफ़ाई

हर बार जब भी बच्चे को नहलाओ या नैपी बदलो। नाल को उठा कर उसे और उसकी जड़ के आसपास ऐंटिसेप्टिक लिक्विड से साफ़ कर लो और फिर ऐंटीसेप्टिक क्रीम लगा दो। जड़ के इलाक़े में कभी कभी पस बन जाती है या उसमे से चिपचिपे पानी का रिसाव होता है। ऐसे में डरो नहीं ऐंटिसेप्टिक की सुरक्षा से डट कर मुक़ाबला करो।

गर्भनाल को सूखा रखो

जब भी सम्भव हो नाल को हवा लगा दो। नेपी के साथ ढीले झबले या टीशर्ट हवा का आवागमन बनाए रखते हैं। गरमियों में पेट पर का कपड़ा मोड़ दो जिससे कपड़ा ज़ख़्म पर रगड़े नहीं और इसे सूखने में मदद मिले। ध्यान रहे कपड़ा खोलने पर यह नाल बच्चे के पेशाब में कभी ना भीगे। सर्दियों में बच्चे को धूप लगाते समय नाल को भी धूप दिखाएँ।

गर्भनाल को अपने आप झड़ने दो

अगर सूत बराबर खाल से भी नाल लटकी है तो उसे खींचो नहीं। यह प्रकृति का कार्य है। उसे अपनी गति से करने दो, धैर्य रखो। नाल झड़ने के बाद कच्ची खाल से अगर ख़ून या पानी का रिसाव हो तो ऐंटिसेप्टिक और क्रीम का नियम बनाए रखो।

नाल का संक्रमण

जब हम नाल की सफ़ायी में लापरवाही करते हैं या उसकी पूरी तरह से उपेक्षा करते हैं तो यह संवेदनशील अंग, संक्रमण यानी इन्फ़ेक्शन का शिकार हो जाता है। थोड़ा बहुत संक्रमण ऐंटीबायआटिक क्रीम से क़ाबू किया जा सकता है पर अधिक होने पर बच्चे को ऐंटीबायआटिक दवाई पिलाना ज़रूरी हो जाता है।

नाल पर कुछ लोग पाउडर छिड़कते हैं, यह ठीक नहीं है क्योंकि पाउडर जमा हो जाता है और रिसाव के साथ मिलकर पपड़ी बना देता है। इसने कीटाणुओं के पनपने की संभावना बढ़ जाती है।

डॉक्टर के पास लाने की ज़रूरत तब पड़ेगी जब:

 

 

 

  • बच्चे को बुखार हो।

 

 

  • नाल की जड़ से ख़ून बहे।

 

 

  • नाल से पस निकले।

 

 

  • नाल में से दुर्गन्ध आए।

 

 

  • नाल के आसपास लाली या सूजन हो।

 

 

  • नाल के आसपास छूने पर बच्चा चीख़ कर रोए।

 

 

इन परिस्थितियों में डॉक्टर को दिखाना ज़रूरी है।

अपनी डॉक्टर के इस मार्गदर्शन के बाद मैंने बिना डरे अपनी बेटी की यह अवस्था सकुशल पूरी की। यह सलाह बाद में भी मेरे भाईं, बहन और परिचितों के बच्चों के लिए काम आती रही। मेरा मन आज भी अपनी नर्मदिल और समझदार डॉक्टर का आभारी है।

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