आँख है भरी भरी, और तुम मुस्कुराने की बात करते हो
172539
2
6
|   May 08, 2017
आँख है भरी भरी, और तुम मुस्कुराने की बात करते हो

8 may. वो दिन जो रुचि कभी नही भूल पाएगी।उस बात को 11 साल हो गए, फिर भी हर साल इस तारीक को रुचि और रवि उस गुड़िया को याद कर कर रोते हैं। वो गुड़िया जिसने उन्हें माता पिता बनने का अहसास तो दिलाया, पर ......। बिना कुछ कहे बिना कुछ बोले कही चली गयी।

5 महीने गर्भ में थी। कभी कभी थोड़ी हलचल करती थी, पर.......। ये पर नही होता तो दुनिया कुछ अलग ही होती। एक दिन अल्ट्रासाउंड की रिपोर्ट में आया बच्चे में सांस नही चल रही है। क्या हुआ क्यों हुआ ना डॉक्टर को, ना माँ को पता चल पाया।

आज रुचि 2 बच्चों की माँ हैं। एक पूरा भरा परिवार हैं। रुचि और उसके पति ने तय किया था कि उस बच्चे को याद करकर वो कभी नही रोएँगे। 

तय उन्होंने किया था, पर इस दिल का क्या करे। ये दिल हैं कि मानता ही नही। आज भी हर साल 8 मई को रुचि और रवि , खुले आसमान के निचे, अपने उस तारे को ढूंढते हैं, जो उनका कभी हुआ ही नही।

एक साल ,दस साल, बीस साल ,या पचास साल बीत जाए, माँ अपने उस जिगर के टुकड़े को कभी ना भूल पाएगी। मैं बस इतना सोचती हूँ, की जिस औरत ने अपना बच्चा गर्भ में खोया , उसके लिए जीना इतना मुश्किल हैं तो उस माँ पर क्या बीतती होगी जिसने अपने बच्चे को गोद में खिलाया, और किसी कारनवस उसे खो दिया। 

बस भगवान से ये प्राथना करती हूँ कि वो किसी को ये दिन न दिखाए। एक और गुज़ारिश हैं , चलती सांस को बंद न करे। चलती सांस बंद होने का दुख, सिर्फ वो माँ जानती हैं, जो चाहती थी कि वो सांसे चलती रहे।हम क्या चाहते हैं क्या नही, हमारे बस में नही। बंद सांसे फिर से चलना हमारे बस में नही, पर चलती सांसो को बंद नही करना, हमारे बस में ज़रूर हैं। 

Read More

This article was posted in the below categories. Follow them to read similar posts.
LEAVE A COMMENT
Enter Your Email Address to Receive our Most Popular Blog of the Day