बच्चो की पढ़ाई या घर की सफाई
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|   May 02, 2017
बच्चो की पढ़ाई या घर की सफाई

एक पल में हम एक ही काम कर सकते हैं। या तो बच्चों को पढ़ा ले, या घर साफ कर ले। मेरी सास को सफाई का फ़हम है। सफाई मुझे भी पसंद हैं, पर फ़हम नही। गंदा  हैं तो साफ कर लो पर ,साफ को क्या बार बार रगड़ना?

पहले पहले मुझे ये,हद से ज्यादा ,सफाई बहुत अखरती थी। पर अब आदत हो गई है।सच बोलू थो मेरी एक सहेली ने मुझे समझया। उसने कहा हमे बहुत  कुछ देखना और सम्भालना पड़ता है। किचन का काम , कपड़े, बच्चों की पढ़ाई आदि।

पर बड़े उम्र की औरतें , खास कर के हाउसवाइफ को इतना कुछ नही देखना पड़ता है। बल्कि उन्हें ये नही समझ आता कि क्या करे। वो बोर होती हैं। इसलिए वो अपना मन इन चीज़ों में लगाती है।

मैने कही पढ़ा लाइफ आफ्टर 60। उसमे था कि पोते पोती को संभालना उनका फ़र्ज़ नही। सच वो आपकी ज़िमेदारी नही है। पर अगर आपकी बहु कुछ किचन में काम कर रही हैं तो अगर आप बच्चे को खाना खिला दे या कपड़े बदल दे तो उसकी मदद हो जाएगी। 

मुझे पता है ,और मैं मानती भी हूँ ,कि आपने भी पूरे जीवन ये ही किया हैं। पर थोड़ी सी मदद की उमीद तो हम कर ही सकते है। आपको जो पसंद हो वो कर ले, बच्चे को खिलाना या उसके साथ खेलना। 

अगर वो भी न करे तो अटलीस्ट थोड़ा पेशेंस रखे। काम सब होगा और होता भी हैं। पर बाद का काम बाद में हो सकता हैं। मेरी नज़र में बच्चो की पढ़ाई सबसे ज़रूरी हैं, बाकी काम उनके स्कूल जाने के बाद हो जाएंगे।

आप या मैं, कोई गलत नही हैं। दोनो अपनी अपनी जगह सही है। पर दोनों की प्रियोरिटीज अलग अलग हैं। अगर थोड़ा आप मुझे समझे और मैं आपको, तो सास बहू, माँ बेटी बन जाएंगी।

ये मैने इसी उमीद के साथ लिखा है की अगर कोई बहु इसे पढ़ रही हो तो सास से कहे कि माँ मैं ये थोड़ी देर बाद कर लुंगी। और अगर कोई सास ये पढ़ रही हो तो वो कहे, बेटा बच्चों को पढ़ा के कर लेना।

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