डर है मुझे ,तुझे खो न दु।
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|   May 27, 2017
डर है मुझे ,तुझे खो न दु।

नीतू भाभी की नई नई शादी हुई थी। भईया भाभी दोनो आगरा घूमने गए। वहाँ कहीं किसी मस्जिद के सामने एक फ़क़ीर ने कहा कि 7 महीने में उसे एक बेटे की माँ बनने का सौभाग्य प्राप्त होगा। शादी को अभी महीना ही हुआ था। भईया को लगा ऐसे ही बोल रहा है। कम से कम 9 महीने तो लगते ही है। और अभी तो खुश खबरी थी भी नही। पर पता नही क्यों, नीतू भाभी का मन किया उस फ़क़ीर की बात पर एतबार करने का। 

कुछ दिन बात नीतू भाभी को पता चला वह माँ बनने जा रही है। डॉक्टर के पास गए तो पता चला, इस प्रेगनेंसी में बहुत रिस्क है। डॉक्टर ने कहा बच्चा गिरा दो । भईया ,भाभी को बहुत प्यार करते थे। उन्हें बस ,भाभी की चिंता थी। पर भाभी को माँ बनने की ज़िद्द। आखिर एक पति , एक माँ के सामने हार गया। 

शहर के सभी डॉक्टर ने नीतू भाभी का केस लेने से मना कर दिया। एक डॉक्टर ने हामी भरी पर भाभी के रिस्क पर।

नीतू भाभी को चलना फिरना बिल्कुल मना था। बच्चा बहुत नीचे था। खून भी कम था, पानी भी कम था। महीने में दो बार अस्पताल में भर्ती होने पड़ता। छट्ठे महीने में तो सब ने उम्मीद ही छोर दी थी।पूरे महीने भाभी का पाव पंखा से लटका कर रखा गया। पर नीतू भाभी को अपने भगवान पर पूरी आस्था थी। 7 महीने खत्म होते ही, आठवे महीने का पहला दिन,  और नीतू भाभी को दर्द चल गए। तुरंत अस्पताल मे दाखिल किया और ऑपेरशन हुआ। ये आज से 30 साल पहले की बाद है। तब तकनीक इतनी एडवांस्ड नही थी। बच्चा कुल 1.5 kg का हुआ। 

तब बच्चो का अस्पताल अलग होता था। माँ से बच्चें को दूर रखा गया। बस बच्चें की सांस चल रही थी, बाकी कोई भी डॉक्टर कुछ नही कह रहा था। 

नीतू भाभी की सास वहमी थी। वहमी न भी कहो तो ये कह सकते हैं, पंडितों के चक्कर लगाने वाली। भईया के सितारों ने बताया संतान सुख नही है। भाभी के तारो का कहना था, तक़दीर से लड़ना होगा। जीत हो भी सकती है नही भी। नही जैसा सब्द भाभी की डिक्शनरी में नही था। 

बच्चें को ले कर दो महीने अस्पताल में रहना पड़ा। 6 महीने तक उसे रुई में लपेट कर रखा। रुई की बत्ती से बूंद बूंद कर कर दूध पिलाना। बच्चे को गोद में लेने से सब डरते थे, सिर्फ उसकी माँ उसे संभालती थी। साल भर भईया भाभी कहीं भी घर से बाहर नही गए। जो एक महीने का बच्चा करता हैं, मन्नत ने 6 महीने में किया। जो 6 महीना का बच्चा करता वह सब मन्नत ने 2 साल में किया।

कहते हैं ना all well that ends well. सो फाइनली नीतू भाभी ने भगवान ,डॉक्टर और तक़दीर से लड़कर , सबको हरा दिया। जीत हुई तो सिर्फ ,और सिर्फ एक माँ की।

 

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