महजब देखे या दिल freedom from bias
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|   Aug 13, 2017
महजब देखे या दिल freedom from bias

बचपन से सुनती आयी हूँ, हिन्दू मुस्लिम- हिन्दू मुस्लिम- हिन्दू मुस्लिम। बचपन से सुना है, पर दिल ने कभी इस बात की गवाई नही दी। क्लास में कितने बच्चे हिन्दू थे, कितने मुस्लिम, न टीचर को पता था न हमे। फिर मोहल्ले में कितने हिन्दू है कितने मुस्लिम, इससे हमें क्यों फर्क पड़ता है?

दिल्ली हो या कलकत्ता, मुम्बई हो या चेन्नाई, जितने हिन्दू है उतने ही मुस्लिम भी। फिर क्यों गिनती रखनी। सच बोलू तो ,न मुस्लिम से प्यार था न नफ़रत । neutral थे। इस हिन्दू मुस्लिम के भेद भाव को यहीं छोड़, आगे बढ़ते है।

अमीर गरीब। आज की बात नही कर रही। पर जब मै स्कूल में थी, मुझे नही पता था किस फ्रेंड के पास कौनसी गाड़ी है। उससे फर्क ही नही पड़ता था। दोस्ती इंसान से करते थे, उसके पापा के पैसों से नही। संग बैठ कर खाते थे। संग खेलते थे।

15 अगस्त, भारत को आज़ादी मिली। भारत आज़ाद है। क्या हम भी आज़ाद है? क्या भारतवासी आज़ाद है? किसकी कैद में है हम? अमीर गरीब और हिन्दू मुस्लिम?

मुस्लिम से दोस्ती नही करते। जो हमारे घर का सारा काम करती है, उसके साथ बैठ कर खा नही सकते। क्यों?

मैंने ऐसा भेद भाव नही किया,न अपने बच्चो को करने दूँगी। मेरी साहिका एक मुस्लिम है। मुझे उसके हाथ का पानी पीने में अपराध महसूस नही होता। भगवान से डर नही लगता। लोगो से छुपाना ठीक नही लगता। 

एक छोटी सी बात। हम रेस्टोरेंट में खाते है, कुक हिन्दू है या मुस्लिम नही पूछते। डॉक्टर इलाज से पहले महजब नही देखता। मरीज़ डॉक्टर का मज़हब नही पूछता। फिर हम क्यों इस भेद भाव में पड़े हैं। 

अफसाना और रुकसाना का नाम मैंने नही बदला। उन्हें मुनी या काजल कहने को दिल नही करता। उनका अपना वजूद है, और उसे बदलने या मिटाने का मुझे हक़ नही।

मम्मी को पसंद नही था, पर उन्हें भी समझ आ गई बात। अब जब मैं अफसाना और रुकसाना के साथ रहती हूं, मुझे पता चला कि इन लोगो की किताब में कितनी अच्छी अच्छी बातें लिखी है। हमारे पुराणों जैसे। झूठ बोलना, चोरी करना, गलत काम करना, सब वनजित है, सब के दुष्परिणाम है। 

एक बार मैं बीमार थी, उसने मेरे लिए मन्नत मांगी। 6 घंटे तक बिना रुके कुरान पढ़नी थी और उसने पढ़ी। और मेरी तबीयत ठीक हो गयी । मन्नत या कुरान पर यकीन नही, विस्वास हैं तो उसके विस्वास पर।

इस आज़ादी के दिन, आप सभी से प्राथना करती हूं, देश को सही माइने में आज़ादी दिलाए। उच्च नीच, जात पात से मुक्त करे। 

जय हिन्द। वंदे मातरम। 🙏

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