भाई के साथ...वो पहला रक्षाबंधन...
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|   Aug 06, 2017
भाई के साथ...वो पहला रक्षाबंधन...

तीन बहनों के बाद मेरे भाई का जन्म हुआ था, इस लिए बहुत खास था उसका जन्म हमारे परिवार के लिए। और उसके जन्म का दिन भी कुछ खास था, क्योंकि रक्षाबंधन के ठीक एक दिन पहले वो हमारी दुनिया मे आया था।  सब बड़े खुश थे। मैं उस समय सात वर्ष की थी। और मेरी दोनों बहनें मुझसे भी छोटी थीं। मुझे अभी भी याद है जब उसे लेकर घर आये थे। बड़े बुजुर्गों को बात करते सुना था - "बहुत ही शुभ दिन जन्म हुआ है इसका। बहनों से राखी बंधवाने आया है।"

मुझे ज़्यादा कुछ समझ तो नही आ रहा था, पर मैं बहुत उत्साहित थी। अगले दिन रक्षाबंधन के दिन हम तीनों बहनों को उसे राखी बांधनी थी। लेकिन वो इतना छोटा था कि उसे छूने में भी डर लग रहा था। और नवजात शिशु के साथ वैसे भी सावधानी बरतनी होती है, इसलिए हम तीनों बहनों को एक एक कर के उसके पास ले जाया गया और कहा गया की सिर्फ राखी उसकी कलाई से छू कर रख दें। हमने वैसा ही किया। लेकिन फिर भी बहुत खुशी हुई। 

उस दिन के बाद कई राखियां आयीं और गयीं। पर वो एक रक्षाबंधन का दिन मुझे आज भी याद है, और हर साल याद आता है। क्योंकि वो बहुत खास था।

आज मेरा भाई बहुत बड़ा हो गया है। उसकी शादी भी हो गयी है। हम इतने दूर दूर रहते हैं कि हर साल रक्षाबंधन पर मिलना भी नही होता अब तो। पर हमारा बंधन आज भी खास है, और आजीवन रहेगा। भाई बहन का रिश्ता ही कुछ ऐसा होता है। लड़ते हैं, झगड़ते हैं, मगर प्यार भी सबसे ज़्यादा करते हैं। उनकी जगह दुनिया में और कोई ले ही नही सकता।

आज के शुभ दिन ईश्वर से यहीं दुआ मांगती हूं कि हमारा, और दुनिया के सारे भाई बहनों का प्यार हमेशा बना रहे, एक दूसरे के लिए स्नेह कभी कम न हो।

धन्यवाद।

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