अमानवीयता (अंतिम भाग) -कुछ दर्द मिटाये जा सकते है पर भुलाये नहीं
71018
4
69
|   Jul 04, 2017
अमानवीयता (अंतिम भाग) -कुछ दर्द मिटाये जा सकते है पर भुलाये नहीं

अमानवीयता- ये एक सच्ची घटना थी जिसने मेरे दिल में एक तेज आक्रोश पैदा कर दिया था और अपने इस आक्रोश को मैंने आपके साथ साँझा किया। कुछ लोगो को लगा कहानी अधूरी है क्योंकि उस समय मुझे खुद भी नहीं पता था इसका अंत क्या होगा।आज मुझे इसका अंत पता है तो वो आप सब को बताने आयी हूँ।

IF you wish to read part 1 please Click here.

साहिल और मुग्धा बहुत सारे जज्बातो और चिंताओं से घिरे थे। अपने कुछ खास लोगो को फ़ोन किया, सलाह ली, सबने कहा ये गलत है। तुम legally जाना चाहो तो चले जाओ but its a crucial time for your mother.

गुस्सा तो बहुत आ रहा था, एक बार तो सोचा कि social media पर post करके उनको उनकी गलती का एहसास कराया जाये पर उस सबसे केवल कड़वाहट ही बढ़ती और अभी इतना extreme जाना ठीक नहीं होगा। मम्मी पापा को कुछ बता भी नहीं सकते थे।

उनसे छुप-छुप कर रास्ते खोजे जा रहे थे।

तभी मुग्धा ने बोला, "साहिल क्यों ना तुम अपने बॉस से बात करो। वो यहाँ काफी समय से है और मम्मी की बीमारी में भी उन्होंने बहुत साथ दिया है हमारा। क्या पता वो कुछ सुझा पाए कि क्या करना चाहिए। इस समय घर खाली करना मम्मी के साथ...? मम्मी की तबियत बिगड़ गयी तो?"

देर रात साहिल ने उन्हें फ़ोन किया। उन्होंने कहा, "घबराओ मत! हम तुम्हारे साथ है जो भी करना पड़े।"

तभी फेसबुक पर scroll करते-करते साहिल को कुछ ऐसा दिखा जिससे ये problem चुटकी बजाकर हल हो गयी।

साहिल ने देखा की मकान मालिक (अंकल जी) के बेटे और उसके बीच उनके बॉस mutual friends है। साहिल को याद आया कुछ साल पहले (साहिल के यहाँ आने से पहले) अंकल का बेटा साहिल की team में ही जॉब करता था।

बस साहिल ने बॉस को बताया, तब तक वो अपने बॉस (director sir) से पहले ही बात कर चुके थे। director sir ने कहा, "अब ये मामला मुझ पर छोड़ दो।" उन्होंने फ़ोन किया अंकल के बेटे को। उन्होंने कहा मैं अपने पापा से बात करके बताता हूँ .और फिर उन्होंने कुछ ऐसा कहा, "लगता है साहिल को कुछ confusion हो गयी है। पापा को तो बस आंटी की तबियत की चिंता थी इसलिए कह रहे थे की उन्हें अपने गांव ले जाओ शायद वो अच्छा महसूस करें। बाकि साहिल जैसा चाहे वैसा हो जायेगा, वो lease continue करना चाहे तो कर सकता है, हमे कोई आपत्ति नहीं है।

साहिल बोला, "मुग्धा confusion तो कोई थी ही नहीं, तुम भी तो वहीँ थी जब अंकल ने साफ साफ कहा था कि मैं नहीं चाहता मेरे घर में कोई मौत हो। खैर इस समय मेरी priority मम्मी है तो मैं किसी ego issue में नहीं फंसना चाहता। Director Sir चाहते है की मैं उनके बेटे को फ़ोन करके confusion clear कर लूँ, तो मैं उन्हें कल call कर के sort out कर लेता हूँ।

और फिर ये मुसीबत तो टल गयी पर दिल में जो सबसे बड़ा खौफ था वो पल पल और करीब आने लगा। हर घंटे मम्मी की तबियत बिगड़ने लगी।
हर रात एक जंग मम्मी को सँभालने की। तबियत के साथ साथ मम्मी का चिड़चिड़ापन और जिद भी बढ़ने लगी, अब वो बर्दाश्त नहीं कर पा रही थी। पूरी रात उनको पकड़ कर रखने के लिए २ लोग भी काम पड़ जाते थी। उनकी तकलीफ को देख कर सबके होंसले टूटने लगे।

और फिर अंकल के आने के ठीक 11वे दिन मम्मी ने कह दिया अलविदा अपने बच्चो को पापा को और इस दुनिया को।

और जाते जाते अंकल की इच्छा का भी मान रख गयी - hospital से विदाई ली, अंकल के घर से नहीं।

अंतिम सभी क्रियायों के लिए भी अपने शहर ही जाया गया जैसा की अंकल कह रहे थे, शुद्धिकरण यज्ञ भी कराया गया।

उचट गया था मन अब इस शहर से, इस घर से। office से आकर साहिल उस घर के अंदर आने की हिम्मत नहीं जुटा पता था जहाँ उसकी मम्मी की यादें थी।

आख़िरकार २-३ हफ्ते बाद, एक दूसरी नौकरी का ऑफर आया, अपने शहर से और साहिल ने तुरंत हां कर दी। इस बार जॉब में package या profile नहीं सिर्फ location important थी।

अंकल को खबर दी जा चुकी है कि अब वो उनका घर खाली कर के जा रहे है, उम्मीद है की अब वो खुश होंगे।

फिर भी किसी भी रूप में उन्हें भी धन्यवाद् की उस बुरे दौर में उन्होंने अपने उस घर में रहने दिया वरना तो शायद। .....!!!!

Read More

This article was posted in the below categories. Follow them to read similar posts.
LEAVE A COMMENT
Enter Your Email Address to Receive our Most Popular Blog of the Day