काज़ीरंगा, पुरी और कोणार्क - बच्चों! ये नहीं देखा तो फिर क्या देखा ?
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|   Feb 14, 2017
काज़ीरंगा, पुरी और कोणार्क - बच्चों! ये नहीं देखा तो फिर क्या देखा ?

काज़ीरंगा

भारत में बहुत सारी वर्ल्ड हेरिटेज साइट्स हैं मगर असम प्रदेश में एक नेशनल पार्क है काज़ीरंगा जो कि वर्ल्ड हेरिटेज साइट है।

जब मैंने वहां जाने का प्रोग्राम बनाया तो सोचा नहीं था कि इतना मज़ा आएगा। पहले पहल तो मज़ा यूं आया कि गौहाटी से काज़ीरंगा की राह बड़ी शांत थी और दोनों तरफ हरियाली थी और पार्क के भीतर गैंडों की भरमार थी इसलिए जीप सफारी ली तब भी गैंडे महाशय के दर्शन हो गए और हाथी पर बैठ जंगल के कुछ दलदल जैसे क्षेत्र में एलीफैंट ग्रास के बीच घुसते हुए गैंडे के नज़दीक पहुँच जाना और भी रोमांचकारी था। मतलब ढेर दिखे गैंडे अपनी मस्त और बेपरवाह ऐटिटूड के साथ। और क्यों न दिखें इतने सारे गैंडे। 

यह नेशनल पार्क सौ साल से अधिक पुराना है और इसमें ढाई हज़ार से ज़्यादा गैंडे हैं। उसके अतिरिक्त टाइगर , हाथी , और विभिन्न पक्षी भी है। लेकिन हम भारत वालों के लिए तो बाकी सब जानवर कोई बड़ी बात नहीं हैं मगर गैंडे भाई की अदाएं तो वाकई ज़ालिम थीं। 

और वहां के जंगल की अलग तरह की वानस्पतिक सुंदरता और विभिन्नता भी काफी नयी थी। यह वन्य क्षेत्र सौ साल से अधिक समय से प्रोटेक्टेड है। और सौ साल पहले से जो प्रोटेक्ट हुआ है तो इसका श्रेय भी ब्रिटिश वाइसराय लार्ड कर्ज़न की पत्नी लेडी कर्ज़न को जाता है जिनके प्रयासों से यह क्षेत्र संवर गया और शिकार के लिए प्रतिबंधित घोषित किया गया। और हाँ हो सके तो आप जहाँ भी रुकें उनसे असमिया स्वाद की एकाध डिश ज़रूर बनवा कर खाएं शर्तिया मज़ा आएगा।

भाई हम तो ये ही कहेंगे काज़ीरंगा न पहुंचे तो कहाँ पहुंचे।

पुरी और कोणार्क

हमारा परिवार ओडिसा में पुरी और कोणार्क घूमने गया। और मेरा मानना है कि जब भी हम कहीं घूमने जाते हैं तो खान पान और वेशभूषा आदि में भी उसी जगह का आस्वाद लेना चाहिए।

लेकिन आज कल पूरे भारत के हर शहर में एक जैसे फैंसी रेस्टुरेन्ट सामने पड़ते हैं और उनमे वो ही एक सा मेनू छपा होता है जो की आम तौर पर मुग़लई और तंदूरी से प्रभावित होता है।

ये ही हमारे साथ पुरी में भी हुआ लेकिन कोणार्क में जब तब सूर्या मंदिर देख कर और समुद्र तट का आनंद उठा कर हम लोग फुर्सत हुए केवल एक ढाबा था जो हमें भोजन परोसने को तैयार था। मैंने सोचा की इस धाबेवाले से कहे कि भाई कुछ अपनी तरफ का खिलाओ। उसने मुस्कुरा कर चावल दाल और एक सब्जी सामने रख दी और फिर अपनी टूटी फूटी हिंदी में पूछा ;छेना पोड़ा खाया;। 

खाना तो दूर हमनें तो यह नाम भी नहीं सुना था, हमने पहले डरते डरते एक प्लेट मंगाई और फिर तो मंगाते गए और खाते गए । खैर जनाब छेना पोड़ा एक बेहद शानदार मिठाई होती है जो कि पनीर और शक्कर को मिक्स करने के बाद बेक करके बनाई जाती है। जबान पर भुने छेने का दरदरापन आता है और आती है करमलाइजड शुगर की मिठास जो कि आपस में मिल कर अनोखी सिम्फनी रच देती है। बाद में यह भी पता चला की यह तो कई मिठाई की दुकानों पर उपलब्ध है मगर हर जगह के छेना पड़ा का स्वाद थोड़ा अलग हो सकता है और अभी कुछ समय पहले ही यह पता चला है कि उड़ीसा का सहकारी दुग्ध संघ छेना पोड़ा को सील पैक कर देश भर में विक्रय करने की सोच रहा है। 

सुन कर ही आनंद आ रहा है क्योंकि तब से उड़ीसा तो नहीं जाना हुआ मगर छेना पोड़ा का आस्वाद ज़रूर ज़बान पर बसा हुआ है। हाय छेना पोड़ा न बार बार खाया तो क्या खाया।

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