These Kids, You know!!!!!! Think again!
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|   Jan 13, 2016
These Kids, You know!!!!!! Think again!

Aren't we as parents passing the buck and playing the same game that we teach our kids not to play, the game to blame others and getting away from things we are responsible for. And we are playing this with our own children!

The verse composition below can make you think for a while and realise about the game we are playing, in which even if we win, we will lose.


बच्चे आज कल के बदल गए हैं I


सुना है बच्चे आज कल के  बदल  गए है,

वो मासूमियत  भरी  बातें, शरारतें  कहीं  घर  की  परछत्तियों  में  खिलोनो  के  बक्सों  में  बंद  हो  कर  रह  गयी  हैंI

बच्चे  अब मासूम  नहीं  रहे I


क्या यह सच है?  मुझे  ऐसा  नहीं  लगता I 

माना  की  ज़माना  बदल  रहा  है ,

किताबें  कंप्यूटर  में  तब्दील  हो  गयी  हैं ,

बातें chatting में  बदल  गयी  हैं , 

गली  में  खेले  जाने  वाले  खेल  कमरों  में  बंद  हो कर  टीवी  में  कैद हो गए  हैं ,

पर  बच्चे  आज  भी  उन्ही  बातों  पे  रूठते  मानते  और  ज़िद्द  करते  हैं  जिन  पर  हम  किया  करते  थे I


बर्फ के गोले के लिए २ रुपये माँ या दादी से मांगते थे हम I

न मिले तो सबसे रूठ जाते थे और मिले तो माँ को चूम कर दीवार फांद कर भागते थे हम I 

बच्चे आज भी रूठते जाते हैं Clash  of Clans के gems  न मिलने पर, 

और चूम लेते है माँ-बाप को gems खरीद कर देने पर ।


कहाँ है फर्क बच्चों में ?


पहले जब दोपहर को माँ सोती थी, 

तब चुपके से आँगन के गेट के नीचे से खेल के मैदान में भाग जाया करते थे हम ।

बच्चे आज भी माँ के दोपहर को सोने का इंतज़ार करते हैं,

Playground नहीं जाते पर PlayStation पर football ज़रूर खेल लेते हैं ।


कहाँ बदले हैं बच्चे ? 


हम जब बच्चे थे बहुत से सवाल उमड़ते थे हमारे मन में और बार-बार माँ-बाप से ही पूछते थे हर सवाल ।

परेशान नहीं होते थे वो।

पापा की गोदी में बैठ कर मिलते थे जवाब,

रात की कहानियों में भी प्यार होता था बेहिसाब ।


आज भी बच्चे सवाल करते हैं माँ-बाप से office में फ़ोन करके,

और मिलता है जवाब, "Google  पे ढूंढ लो अभी, बात करता हूँ ज़रा meeting के बाद ॥


रात की कहानियाँ कहाँ अब सुनाते हैं माँ-बाप,

शहर की मसरूफियत से थक कर सो जाते हैं माँ-बाप I 

और कहते हैं, "बच्चे आज कल के सुनते कहाँ है,

technology freaks  हैं, बदल गए हैं अंदाज़ इस generation के,

जब छोटे थे हम, इन जैसे नहीं थे।"


बच्चों के पूछे हुए सवाल अब भी वही हैं,

जवाब देने वाले बदल गए ,

प्यार करने के अंदाज़ भी वही हैं,

उनके साथ वक़्त बिताने वाले बदल गए, 

और हम कहते हैं की बच्चे अब मासूम नहीं रहे । 

          

                                                  

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