क्या जादू है इन हाथो में?
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|   Feb 10, 2017
क्या जादू है इन हाथो में?

जब से होश सम्हाला तब से कभी इन हाथों में माँ का हाथ तो कभी पापा का.. कभी हाथों में पेंसिल आयी और फिर पैन .. कभी दोस्तों का हाथ पकड़कर रास्ते तय किये और कभी बहिन भाइयो के.. जब ये हाथ एग्जाम्स में लिख कर फर्स्ट आते तब दिमाग को शाबासी मिलती.. जब किसी के आंसू पोछते तब दिल को..

और बड़ी हुई तो भविष्य को नयी दिशा मिली जॉब के रूप में..जीवन को दिशा मिली जीवनसाथी के रूप में ।  ऑफिस में कम्प्यूटर पर खूब टाइप करते  और घर के सारे काम भी तो निपटाए थे इन हाथो ने.. अच्छे खाने की प्रशंशा मुझे मिली और अच्छे काम को ऑफिस में सराहा तब मेल बॉक्स भर गए।

मगर न कभी मैंने न किसी और ने इन्हें सराहा.. 

वक्त गुजरता रहा और एक दिन एक नन्हा सा फरिश्ता मेरी गोद में आया..और उस दिन जब पहली बार तुम्हे हाथो में लिया तब लगा जैसे किसी परी ने अपनी जादू वाली छड़ी का जादू मेरे हाथों में भर दिया हो.. ऐसा लगा की शायद तुम्हे छूने और प्यार करने के लिए ही इन हाथो की ज़रूरत थी.. लगा की इन हाथो को जो प्यार दुलार और प्रशंशा की जो ज़रूरत थी वो तुम्हे छूने भर से पूरी हो गयी। तुम्हारे वो छोटे छोटे हाथ जब अपने हाथों में लिए तब लगा की जीवन की सारी आशाये पूरी हो गयी । उन नन्हे हाथो को पकड़कर चलना तो तुम्हे सिखाया मगर मैं माँ बनना तब भी सीख रही थी।

और उस दिन जब तुम अचानक से रात में डर गए और  खूब ज़ोर ज़ोर से रोने लगे.. मैंने तुम्हे अपनी गोद में उठाया और  बस थोड़ा थपथपाया..तुम्हारे सर पर हाथ रखा और तुम चुप होकर धीरे धीरे  फिर से मीठी नींद में चले गए तब मैं कभी तुम्हे और कभी अपने हाथों की तरफ देखती रही और सोचती रही की क्या सचमुच कोई जादू है इन हाथों में ?

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