मुझसे बात करो, बेटा !! (भाग - २)
24268
3
|   Aug 04, 2017
मुझसे बात करो, बेटा !! (भाग - २)

सुनिल मेरी आवाज़ सुनकर तुरंत अपनी चाय छोड़कर श्रवण के कमरे में आए। श्रवण मेरी गोदी छोड़कर अपने पापा के पास चला गया, और उनसे चिपककर रोने लगा। सुनील को मैंने सारी बात बताई। बताया उनको की हमारा छोटा सा बच्चा कितना घुट-घुट कर जी रहा है। कैसे उसके साथ उसके स्कूल में ये गलत हरकत हो रही हैं। कैसे एक छोटी सी जान ये अत्याचार इतने दिनों से सह रही है, जिसे लोग सपने में भी महसूस करना नहीं चाहते। 'शारीरिक शोषण' वो भी एक बच्चे का उसी की टीचर द्वारा! सोचकर भी रूह कांपती है मेरी। बच्चे तो एक नाज़ुक फूल की तरह होते है, जिन्हें बहुत प्यार और देखभाल की जरुरत होती हैं। उन्हें हम कैसे शोषित कर सकते है, और वो भी शारीरिक ? 

श्रवण ने हमे बताया की हर रोज़ उसकी टीचर उसे किसी ना किसी बहाने से गलत तरीके से छूती है। पहले तो वो कुछ समझ ही नहीं पाता था की वो ऐसा क्यों कर रही है, पर जब उनकी ये हरकत बढ़ने लगी तब श्रवण को बिलकुल अच्छा नहीं लगता था, उसको बहुत गन्दा लगता था, दर्द होता था। लेकिन वो घर पे कुछ बता नहीं पाता था क्योंकि उसकी टीचर ने कह रखा था की अगर घर पे बताया तो तुम्हारे मम्मी-पापा को मार देंगे। श्रवण सहम जाता, चुप-चाप सब कुछ सहता गया, मेरा बच्चा। 

लेकिन अब हम लोग क्या करे, ये सवाल मेरे और सुनील के दिमाग में घूम रहा था। शांत तो नहीं बैठते हम, सबक तो जरूर सिखाना था उस टीचर को। मगर कैसे....? 

दुसरे ही दिन हम श्रवण के स्कूल गए उसके प्रिंसिपल से मिलने। हमलोगो ने सारी बातें बताई। पहले तो प्रिंसिपल हमारी बातों पे विशवास ही नहीं कर रही थी, क्योंकि उनकी नज़रों में उनके स्कूल की सारी टीचरें बहुत ही अच्छी और अच्छे घरों से थी। पर हमदोनो ने उन्हें समझाया की इस तरह की हरकत करने वाले लोगो की मानसिकता को समझना आसान नहीं है। उनकी ऐसी हरकतों के कई कारण हो सकते है- शादीशुदा रिश्तों में अनबन, परवरिश, आसपास का सामाजिक माहौल और भी बहुत कुछ वजह होती है। पर इसका मतलब ये तो नहीं की हम उनकी ऐसी गन्दी और घिनोनी हरकत के लिए माफ़ करदे। उन्हें सज़ा तो जरूर मिलनी चाहिए, क्योंकि ये एक कानूनन ज़ुर्म है। हमारे देश में भी बच्चों की सुरक्षा के लिए Child Abuse Prevention and Treatment Act (Public Law 93-247) नाम का कानून बना है। 

स्कूल की प्रिंसिपल को अपने स्कूल की बेइज़्ज़ती का भी डर था, क्योंकि वो स्कूल उस राज्य में काफी प्रचलित था। लेकिन फिर भी प्रिंसिपल मैडम ने हमारा साथ दिया और हम सबने मिलकर एक योजना बनायीं, जिससे उस टीचर की असलियत सबके सामने आ सकें।

To be continued....

Read More

This article was posted in the below categories. Follow them to read similar posts.
LEAVE A COMMENT
Enter Your Email Address to Receive our Most Popular Blog of the Day