तुम मुझे समझते क्यों नहीं..
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|   May 10, 2017
तुम मुझे समझते क्यों नहीं..

मुझे आज तुम्हारी पत्नी की दर्जा मिले हुए 7 साल हो गए है, पर आज भी ना जाने क्यों मुझे हमेशा ऐसा लगता है की तुम मुझे कभी समझ ही नहीं पाए। मैं साथ रहती जरूर हूँ, पर कभी तुमसे नज़दीकियां महसूस नहीं की। हमेशा कोई ना कोई शिकायत हमारे दिलों को एक - दूसरे से दूर रखती है। तुम्हारे लिए हमेशा तुम्हारी नौकरी, तुम्हारे माँ-बाप ही जरुरी थे, पर मेरे लिए सदा तुम जरुरी थे। तुम्हे मेरे बोलने के तरीके से हर वक़्त नाराजगी थी, और मैं तुमसे बात करने के बहाने ढूंढती थी। बताना चाहती थी की आज सारा दिन मैंने क्या किया, बच्चों ने मुझे कितना परेशान किया, लेकिन तुम्हारे लिये उस वक़्त देश की दिन भर की खबर सुन्ना ज्यादा जरुरी था। 

तुम मुझे समझाते हो की किस तरीके से बात करनी चाहिए, पर क्या तुम्हे ये बात पता है की दूसरों को समझाने से पहले पहली उनकी बातों को समझना चाहिए। मैंने अपनी पूरी बनी बनाई ज़िन्दगी तुम्हारे नाम कर दी, और तुम मुझे बताओगे की ज़िन्दगी जी कैसे जाती है। तुम्हारे रंग में ढलते हुए मैं खुद ये भूल गयी की ज़िन्दगी के रंग क्या होते है। मगर फिर भी तुम्हे हमेशा मुझसे कोई ना कोई शिकायत ही रहती है।

अगर तुम्हे मेरे किसी भी अच्छे काम को सराहना नहीं आता, तब फिर मेरे किसी भी गलत काम में मेरी सफाई मत मांगो। क्योंकि मैं थक चुकी हूँ, अपने आप को समझाते समझाते, और तुम्हे सफाई देते देते। 

तुमने मुझसे वादा किया था की हमेशा साथ निभाओगे मेरा, मगर तुमने तो साथ शुरू होने से पहले ही छोड़ दिया। 

अब तो बस ज़िन्दगी से समझोता सा कर लिया है, ना मैं अपनी ज़िन्दगी से कुछ मांगूगी, और ना ज़िन्दगी मुझे कोई सपने दिखाएगी। लेकिन फिर भी शिकायत हमेशा रहेगी तुमसे की तुम मुझे समझते क्यों नहीं।

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