मेरी बेटी ,अब मुझे सिखा रही है
731
9
2
|   Jul 16, 2017
मेरी बेटी ,अब मुझे सिखा रही है

मै अन्जू शुक्ला-मुझे पहले लगता था कि मै अभी दो साल पहले ही माँ बनी हूं  लेकिन ये मेरा भ्रम था। मै दो साल से लगातार हर रोज माँ बन रही हूँ,कुछ नया सीख रही हूँ और यही जीवन भर चलता रहेगा । ऐसा लग रहा है जैसे मेरी बेटी माँ बनना सिखा रही हो। मेरी बेटी (मान्या) के जन्म के बाद मेरी दुनिया ही बदल गयी। उसके मेरी जिन्दगी में आते ही मैंने उसके लिए सपने देखना शुरू कर दिया जैसा सभी माँ करती हैं।लेकिन एक दिन अचानक् ऐसा हुवा जिससे मै पूरी तरह से हिल गयी,टूट गयी ।मेरी बेटी मान्या  मूर नखत में हुई ,जन्म के बीस दिन तक सब ठीक चल रहा था फिर अचानक उसे उल्टियाँ (नाक और मुख से )होने लगी। मै और मेरा परिवार बहुत परेशान हो गए और तुरंत डॉक्टर को दिखाया। डॉ.के बताने पे अल्ट्रासाउंड कराया गया तब पता चला कि आहार नली में गाँठ है जिससे दूध पेट में नहीं पहुच पा रहा था 28वे दिन मूर की पूजा की रात लखनऊ में विवेकानन्द अस्पताल में एडमिट कराया गया दो दिन तक गुलोकूस चढ़ने के बाद ऑपरेशन हुआ और सक्सेज रहा । उस दिन मुझे और मेरे पति को मानो भगवान ने मानो दुबारा जिंदगी दी हो और मेरे जिगर का टुकडा मुझे वापस मिल गया। इन सघर्षो से गुजरते हुवे आज मेरी बेटी मान्या 3 साल की होने वाली है।  

                                    

मातृत्व अपने आप में एक पूरी दुनिया है जहाँ हम अग़र अपने बच्चे को कुछ सिखा रहे हैं तो वो बच्चा भी हमें कुछ सिखा रहा है।  मेरी बेटी की दिनचर्या ही अपने आप में एक सबक है।  सुबह को उसकी प्यारी सी मुस्कान लिए उठना मुझे सिखाता है कि कैसे प्यार से हमें अपने दिन को शुरू करना चाहिए । इसी तरह उससे सिखने की प्रक्रिया निरंतर चलती रहती है। उसने ही मुझे सिखाया कि कभी एक कठोर माँ होकर मुझे उसकी गलतियों को सही करना है तो कभी प्यार से उसकी हठ को मानना है । ऐसे तो हर रोज मेरे माँ बनने का सिलसिला चलता रहेगा लेकिन मेरी बेटी की दो सीख मै आपसे बाटना चाहूँगी।।                                                                

सबसे पहला सबक जो मेरी बेटी ने मुझे सिखाया वह है सहनशीलता । अपने पहले कदमो को रखते हुए गिरकर उठकर अपनी चोटों पर पल भर आँसू बहाने के बाद अपनी उस चोट को भूलकर कैसे आगे बढ़ना है ये मेरी बेटी ने ही मुझे सिखाया।                               

दूसरा सबक मेरी बेटी ने मुझे निश्छल प्रेम का दिया। इस स्वार्थी दुनिया में एक छोटा बच्चा बिना किसी स्वार्थ के हर किसी को प्रेम करता है।उसके प्रेम की कोई सीमा नहीं होती ,न ही कोई बंधन होता है। एक बच्चे के पास देने के लिए कुछ नहीं होता फिर भी वो सबका प्यारा होता है।क्योकि उसके पास दुनिया की सबसे बड़ी पूँजी है। निस्वार्थ भाव से प्रेम करने की कला। इस निस्वार्थ ,निस्छल प्रेम से मुझे अवगत कराया मेरी बेटी ने।

    ऐसे कई सीखो से मै एक माँ का  सफ़र पूरा कर रही हूँ। कभी प्यार से तो कभी गुस्से से मेरी बेटी मुझे हर पल एक नई सीख दे रही है। मेरे जीवन की सबसे प्यारी व सबसे अहम टीचर को मेरा बहुत बहुत प्यार।

Read More

This article was posted in the below categories. Follow them to read similar posts.
LEAVE A COMMENT
Enter Your Email Address to Receive our Most Popular Blog of the Day