साइज़ जीरो बन गयी है दुनिया!!!
11789
5
157
|   Jun 21, 2017
साइज़ जीरो बन गयी है दुनिया!!!

यह करीब दस साल पहले की बात है , मैं कॉलेज जाया करती थी। Engineering  कॉलेज के बारे में सुना था की वहां रैगिंग तो होती है पर बाकि कॉलेज से इनका स्तर थोडा ऊँचा होता है, यहाँ कोई किसी का बेतुका मज़ाक नहीं बनाता है । यहाँ पर पढ़ाई के साथ मौज मस्ती और जिंदगी को जिंदादिली से जीने का सबब मिलता है । हर कोई एक दूसरे की मदद के लिए तत्पर और आगे बढ़ाने में लगा रहता है। यहाँ 4 साल की पढ़ाई के बाद दोस्ती इतनी प्रगाढ़ हो जाती है की "brother/sister from another mother"  का ट्रेंड चल गया था।  इसी बीच मुझे समाज की एक विकृति इन मॉडर्न सोच वाले स्टूडेंट्स के साथ साथ, टीचर्स और बाकि लोगो में भी दिखी वो थी मोटी लड़कियो के लिए हीनभावना। जो लड़की मोटी होती वो या तो किसीकी बहिन बनी हुई होती या फिर किसी के मजाक का पात्र। इनकी न तो किसी से दोस्ती होती और हो भी जाती तो उस ग्रुप की वो एक funny member होती। यही कहानी थी मेरी एक सहेली कल्पना की- पढाई में अव्वल , दिखने में नाक नक़्श की अच्छी, समृद्ध घर परिवार से थी। जब 10 वीं में थी तो दवाई के साइड इफ़ेक्ट के कारण, उसे एक और बीमारी लग गयी वो थी मोटापे की। गर्मी की छुटियाँ आते आते उसका वजन इतना बढ़ गया की उसके कजिन और रिस्तेदार उसे अलग अलग मजाकिया नामो से पुकारने लगे। दिमाग से तेज़ कल्पना के दिल पर भी इस बार गहरी चोट लगी। घर से बाहर निकलना, खेलना खुदना यहाँ तक की लोगो के तानो से पेट भरते भरते दिल लगा के खाना पीना भी बंद कर दिया। एक ऊर्जावान लड़की आज अपने मोटापे के कारण अपने आप को शर्मिंदा महसूस कर रही थी। रिस्तेदार आते और उसके मम्मी पापा को भी हिदायत दे कर जाते -इसके खाने पर रोक लगाओ नही तो कोई अच्छा लड़का नहीं मिलेगा, पढाई लिखाई से कुछ नही होता सुंदरता भी मायने रखती है, कोई तो यहाँ तक बोल देता है की जिमन कम करके जिम ज्वाइन कराओ और न जाने कितने ही उपदेश सुनने को मिलते। लेकिन अगर सही माने तो वे लोग भी गलत नही थे , आज जहाँ जीरो साइज़ का जमाना चल रहा है वहां भला एक 80-90 kg  की लड़की कैसे अपने आप को सुंदरता के पैमानों पर खड़ा उतार पाती। 

समय के साथ साथ ये जहर और भी विषेला होता चला गया और उससे कल्पना के दिल और दिमाग को अपंग बना दिया। वजन कम करने की हजार कोशिशो के बाद भी कुछ हाथ न लगा।

कॉलेज तक आते आते उसके अगिनत नाम "मोटू", "मोटल्लो", "हिप्पोपोटामस", "भैंस" , "पहलवान" आदि रख दिए गए। अंदर से पूरी टूटी हुई कल्पना , फिर भी हस्ती और सबको हँसाती रहती और अपने आपको हँसी का पात्र बनाने में उसे अब कोई हिचक नही होती थी। सुंदरता की परिभाषा उसके लिए बदल चुकी थी, और वेस्टर्न ड्रेस पहनना उसके लिए एक सपना सा था।

समय के साथ साथ इंजीनियरिंग खत्म हो गयी और कॉलेज के टोपर होने के साथ साथ उसका जॉब अच्छी सी I.T COMPANY में 4 लाख के पैकेज पर लग गयी। लेकिन उसका बचपन का दोस्त उसका मोटापा वहां भी उसका साथ छोड़ता नज़र नहीं आया, और वहां भी वही बाते सुनने को मिली। राह चलते लोग भी कई भोंडे शब्द का प्रयोग करते और उनका नजरिया बदला हुआ होता। 

कुछ ही साल में उसका प्रमोशन उसके हुनर और capabilities के कारण हो गया और पैकेज 6-7 लाख तक पहुच गया। 

बेटी को स्टेबल होते देख और उम्र को बढ़ते देख अब उसके माता पिता को उसके शादी की चिंता सताने लगी। अब रिश्तेदारों और कई मैरिज ब्यूरो को उसके बायोडाटा देना शुरू हो गया। लेकिन फिर से वही मोटापा उसके सारे गुणों को नज़रअंदाज़ करवाता रहा। कई लड़को वालो ने उसे यही कह कर मना कर दिया की लड़के को लड़की पसंद नहीं है, या फिर लड़की की हेल्थ थोड़ी ज्यादा है। इसमें भी उनकी कोई गलती नहीं हर कोई अपने घर पर सुन्दर , सुशील और संस्कारवान लड़की बहु के रूप में चाहता है यहाँ गौर करिएगा "सुंदरता" सुशीलता और संस्कारवादिता पर कई ज्यादा गुना हावी थी। 

बहुत मसक्कत के बाद एक जगह बात बन गयी लड़का भी इंजीनियर था और पैकेज भी करीब 5-7 लाख का था, दिखने में साँवला और हेल्थ भी अच्छी खासी थी (लड़को को मोटा नहीं बोल सकते न)। 

शादी पक्की होते से ही सब उसे फिरसे हिदायत देने लगे और अजीब अजीब से नुश्खे बताने लगे। उसने भी योगा क्लास , एरोबिक्स और कितने ही डायटीशियन से संपर्क करके कुछ वजन कम करने की कोशिश की और थोड़ी सफल भी हो गयी।

शादी के कुछ साल बाद फिरसे वही मोटापा अपना इस बार दानवी रूप ले कर सामने आया। हर कोई  फिरसे उसका मज़ाक बनाने लगे और हिदायत देने लगे, वो भी इस बार मोटापे से परेशां हो गयी । समय के साथ साथ मानसिक और शारीरिक तौर पर वो कमजोर और बीमार सी हो गयी। बच्चे के होने के बाद उसकी हालत और भी ख़राब होते चले गयी, यहाँ तक की जॉब तक छोड़ना पड़ी। बढ़ते वजन ने उसका और उसके जीवन का मनोबल तोड़ दिया था। 

आज ना जाने कितनी लडकिया है जो या तो बचपन से या उम्र के किसी न किसी पढ़ाव पर इस मोटापे रुपी बीमारी से ग्रसित है । कारण चाहे दवाई का साइड इफ़ेक्ट हो, unhealthy खान पान हो, मानसिक और शारीरिक तनाव हो या फिर शरीर को ले कर लापरवाही हो। 

ये मोटापा जितना एक लड़की के शरीर को दीमक की तरह खाता है उससे ज्यादा हमारे अपने लोग रिस्तेदार, समाज और मोटापे को लेकर बने व्यंग्य और भद्दे मजाक उसके दिल और दिमाग को लकवाग्रस्त कर देते है। कोई भी इंसान मोटा नहीं होना चाहता , ये भी एक आम बीमारी की तरह ही बीमारी है ये समझना जरुरी है। और मोटापे से ग्रस्त लोगो के साथ अन चाहा व्यवहार करना उनके मान सम्मान का मजाक उड़ाना बंद करके उनको शारीरिक और मानसिक रूप से इतना मजबूत बनाना चाहिए की वो भी इस बीमारी से आसानी से छुटकारा पा सके।

आज योग दिवस पर यही कहूँगी की माना मोटापा कई बीमारियों की वजह होता है , इससे उम्र कम हो जाती है कई शारीरिक बीमारियाँ लग जाती है। लेकिन बाकि बीमारियो की तरह ही इस बीमारी में भी हमे उनको प्यार - दुलार, सहानुभूति , positiveness और जीवन में डिसिप्लिन से सही किया जा सकता है ना की ताने और भोंडे मजाक से।समाज में फ़ैल रहा ये साइज़ जीरो का ट्रेंड भी कितनी ही लड़कियो की जिंदगी के साथ खेल रहा है । अपने बच्चों को सही आहार, दिनचर्या और योग (एक्सरसाइज) के प्रति जागरूक करने से हम स्वस्थ (न मोटे न ही साइज़ जीरो)  रह सकेंगे। समाज में फैली ये संकीर्ण सोच को हमे सबसे पहले हमारे दिल दिमाग से हटाना होगा, तभी हम सही रूप से BROADMINDED  हो पाएंगे।

Read More

This article was posted in the below categories. Follow them to read similar posts.
LEAVE A COMMENT
Enter Your Email Address to Receive our Most Popular Blog of the Day