धूप
1505
|   Jul 15, 2017
धूप

एक कविता, जो जीवन में धूप की एक किरण क्या उम्मीद लेकर आती है, उसका वर्णन करती है. 

जब अंधेरा घना हो, दिल में,

जैसे घने काले साए हों आसमान में,

कुछ नज़र नही आता साफ़,मन भटकता है निरंतर,

यहाँ वहाँ इधर उधर,

सोचता हूँ,कोई रोक दे यह उथल पुथल,

कहीं ले ना जाए ये लहरें बहा कर मुझे,

और गहराईयो में अपने साथ,

तब दूर कहीं किसी छोर,

चमकती है, सूरज की एक किरण,

जो बन जाती है मेरे जीवन की डोर,

और हाथ पकड़ कर खींच लेती है मुझे,

लंबे काले अंधेरे से अपनी और,

और कहती है मुझे,

यूँ ही नहीं जाने दूँगी तुझे,

अभी तो हू मैं, साथ साथ चलना है,

बार बार गिरना और संभालना है,

मन में विश्वास हिलोरे लेता है,

कोई हाथ किसी अपने का जैसे,

काले अंधेरे से रोशनी में खींच लेता है,

बस यूँ ही अंधेरों और उजालों में गोते लगाता हूँ,

और खुद को मंज़िल के करीब पाता हूँ.

और खुद को मंज़िल के करीब पाता हूँ.

we read a lot about depression and problems related with that. I have seen a lot of friends and people from all walks of life who suffer from depression, looking for support and ways to get out of this situation.Though love, support and help from friends and families is important to come out of this bad phase, I think it's also necessary to see the light through the darkness.This poem is a way of telling people to not to lose hope and keep oneself motivated and going even if life keeps on pulling you down because when one fights back with all the strength, success will definitely be his. So, be hopeful and be confident. Trust yourself.Get up and enjoy the life to the fullest.

सुनते हैं, सब्र का फल मीठा.तो जीवन जब हो रीता,साथ रहो अपनों के,पता नहीं होगा

जीवन कब बीता

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