सपने: किसी भी उम्र में देखे जा सकते हैं
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|   Apr 20, 2017
सपने: किसी भी उम्र में देखे जा सकते हैं

जीवन की गति कितनी तीव्र होती है और साथ ही एक छलावा भी! इतने व्यस्त रहते हैं हम अपने जीवन क्रम और उसके घटना चक्र में, कि गति का भान तक नहीं रहता. एकाएक, जब थोड़ा विराम मिलता है तो ठगे से रह जाते हैं!... अरे! यह कहां से कहां आ गए हैं हम!

अंतर्मन की गहराइयों में तो कहीं लगता है - हम अभी भी जिंदगी के उसी मोड़ पर खड़े हैं जहां मन आशा से ओतप्रोत था, कोई भी परिस्थिति बाधा नहीं लगती थी. सामने एक अनंत विस्तार दृष्टिगोचर होता था रहस्यमय सा! पता नहीं, क्या-क्या मिलने वाला है! पता नहीं कहां से कहां पहुंच जाने वाले हैं! बस …. अनंत विस्तार में संभावनाएं ही संभावनाएं! अनगिनत द्वार संभावनाओं के!

किंतु उम्र का यह बड़ा हिस्सा - जिसमें पति, बच्चे, घर – गृहस्ती, समाज-परिवार - यह सब प्राथमिकता के दायरे में इस कदर फैल गए कि आशाएं, संभावनाएं - जीवन के पन्ने पर मानो हाशिए में सिमट कर रह गई. कर्तव्यबोध इस कदर हावी हो गया कि व्यक्तिगत आशाएं - आकांक्षाएं सब कहीं कई - कई परतों के नीचे दबती चली गई. यदा-कदा सिर उठाती थी पर कर्तव्यबोध इस कदर घेर लेता था की सबको फिर दबना ही पड़ता था!

आज दिल कर रहा है फिर वही पहुंच जाऊं उसी अनंत विस्तार के सामने संभावनाओं के असीमित स्वप्नों के सामने!

क्यों नहीं पहुंच सकते हम पुनः उस मोड़ पर? उम्र, बीते वर्ष - यह सब तो गणना के लिए हैं. तन की संभावनाओं

को सीमित कर सकते हैं पर मन की उड़ान को तो नहीं ना!...... और अब तो अनुभवों का एक लंबा सिलसिला भी है साथ में. अपने आप को तटस्थ भाव से देखने की, साक्षी भाव से देखने की जो आदत विकसित की है- उसने कितना असंपृक्त बना दिया है इस लंबे घटनाक्रम से! बीते वर्षों में किसी खास समय में कोई खास घटना कितने मायने रखती थी. मानो जिंदगी का सारा दारोमदार बस उसी पर टिका हुआ है!

आज हंसी आ रही है! पर आज ना!!? उस वक्त हंसी नहीं आती थी. उस वक्त तो वही अमुक घटना या परिस्थिति सारे अस्तित्व पर छा जाती थी!

आज तो फिर से उड़ान भरने को जी चाह रहा है! क्या मैं सचमुच अब उड़ पाऊंगी?

क्षत-विक्षत पंखों को फिर से उड़ने लायक बना पाऊंगी?

दिल कह रहा है - संभव है. मन की ताकत को पहचान और सारी शक्तियां समेट कर खड़ी हो जा. सपने देखना मत छोड़. सपनों का रूप बदल सकता है पर सपने तो हर उम्र में देखे जा सकते हैं और उंहें पूरा भी किया जा सकता है.

चाहती हूं अब मेरा शेष जीवन ऐसा हो जो प्रेरणा बने - उम्र के किसी भी मोड़ पर किसी को निराश ना होने दें. जब तक जीवन है तब तक संभावनाएं भी हैं. बस जरूरत है एक निश्चय की, निरंतर क्रियाशीलता की.

सपने किसी भी उम्र में देखे जा सकते हैं, किसी भी उम्र में नए लक्ष्य निर्धारित किए जा सकते हैं!!

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